
नवरात्रि का त्यौहार आता उससे पहले ही छत्तीसगढ़ से ऐसी ख़बर सामने आई, जिसने 100 करोड़ हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंचाई है. ये बात तिरुपति बालाजी के प्रसाद में मिलावट से भी बड़ी है, क्योंकि यहां बात प्रसाद में मिलावट की नहीं बल्कि प्रसाद बनने की जगह की है. वो कोई मंदिर या पवित्र जगह नहीं थी, बल्कि एक पोल्ट्री फार्म था, जहां मुर्गियां पाली जाती हैं. जहां की दुर्गंध दूर तक महसूस होती है और इसकी बानगी इस तस्वीर में देखिए. सफेद रंग के पैकेट में जो प्रसाद रखा है और इसके नीचे जो लाइन लिखी है उसे ध्यान से पढ़िए.

लिखा है साफ एवं पवित्र वातावरण में निर्मित, लेकिन होता इसके ठीक उलट था. इस प्रसाद को एक पोल्ट्री फार्म परिसर में बनाया जाता था, जिसके मालिक का नाम है मजहर खान. ये सिलसिला कितने वक्त से चल रहा था इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है लेकिन जैसे ही खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम ने उसकी पोल्ट्री फार्म पर छापा मारा. कई बड़े राज खुलकर सामने.
जिला खाद्य एवं औषधि अधिकारी डोमेन्द्र ध्रुव बताते हैं... डोंगरगढ़ ब्लॉक के राका गांव में एवन ट्रेडर्स में छापा मार गया है. हमें सूचना मिली थी कि यहां से डोंगरगढ़ सहित कई धार्मिक स्थलों में इलायची दाने का सप्लाई किया जा रहा है. यहां प्रसाद के पैकेट में एक्सपायरी डेट अंकित नहीं की गई है. ऐसे में प्रसाद की गुणवत्ता जांच करना जरूरी है. यहां से प्रसाद का सैंपल जब्त किया है और जांच के लिए भेजा है. गड़बड़ी मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
पोल्ट्री फार्म वाली बात डोमेन्द्र ध्रुव अपने बयान में नहीं बताते, लेकिन एक हिंदी वेबसाइट द सूत्र बकायदा इसी हेडलाइन के साथ ख़बर प्रकाशित करता है कि मुसलमान के पोल्ट्री फार्म में बन रहा था, मनोकामना पूरी करने वाली मंदिर का प्रसाद. इस मंदिर की मान्यता इतनी बड़ी है कि कहते हैं यहां जो भी मन्नत मांगो मां बगलामुखी जरूर पूरा करती है.
क्या है मां बमलेश्वरी मंदिर का इतिहास
करीब 1100 सीढ़ियां चढ़कर इस मंदिर में भक्त दर्शन के लिए जाते हैं, लेकिन अब उन भक्तों की आस्था अंदर ही उन्हें कचोट रही है. वो खुद से ही ये सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर हमारी शुद्धता को भंग करने की ये कैसी साजिश है. पहले आंध्र प्रदेश के पवित्र तिरुपति मंदिर के लड्डू में चर्बी वाले घी का मिलाया जाना और अब छत्तीसगढ़ से इस तरह की ख़बर सामने आना, क्या ये इशारा कर रही है कि हर मंदिर के प्रसाद की जांच होनी चाहिए.
राजनंदगांव के आसपास के मंदिरों में चढ़ने वाले भोग की जांच की मांग जितनी तेजी से उठ रही है. उतनी ही तेजी से इस बात की मांग भी उठी है कि मंदिरों में सूखे प्रसाद का भोग लगाया जाए. ये मांग कई साधू-संत लंबे वक्त से उठा रहे हैं, लेकिन ये सोचकर ही हैरानी लगती है कि जिस राज्य के मुख्यमंत्री का नाम विष्णुदेव हो, उनके राज्य में मजहर खान जैसे लोग मां दुर्गा का ऐसा अपमान करते हैं और फिर भी योगी की तरह उनका कोई धाकड़ रिएक्शन सामने नहीं आता.
अगर पोल्ट्री फार्म में प्रसाद बनने की बात सच है तो फिर एक्शन ऐसा होना चाहिए कि एक नहीं बल्कि सात पीढ़ियां याद रखे. ऐसे लोगों को आपके हिसाब से क्या सजा मिलनी चाहिए, जरूर बताएं, ताकि तिरुपति और बमलेश्वरी मंदिर के बाद किसी और मंदिर में कोई ऐसा करने की हिमाकत न करे, ये ऐसे वक्त में हो रहा है, जब कुछ ही दिनों में नवरात्रि का त्यौहार शुरू होने वाला है.