नई दिल्ली: UGC का नियम देश में लागू हो रहा है फिर योगी आदित्यनाथ की कुर्सी पर बात क्यों हो रही है? हालात बंगाल के ख़राब है लेकिन UP में राष्ट्रपति शासन की बात क्यों हो रही है? क्या ये बीजेपी ने नियम थोपा है? योगी पर कोई आंच आने वाली है ? वो 10 सवाल जिनका जवाब शायद ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं! इसकी पूरी क्रोनोलॉजी समझनी होगी...
वो डीएम अविनाश सिंह पर सीधा आरोप लगाते हैं कि मुझे 40 मिनट तक बंधक बनाया गया, यहां तक कि वो यूपी में राष्ट्रपति शासन का राग अलापने लगते हैं.. बात यहीं खत्म नहीं होती बल्कि मेरठ के सलावा गांव में बीजेपी के कोर वोटर बैंक कहे जाने वाले ठाकुर समाज के लोगों ने बीजेपी के सामूहिक बहिष्कार का ऐलान करने लगते हैं..
जबकि मुजफ्फरनगर में करनी सेना के प्रदेश महासचिव गौरव चौहान ने एक विवादित अपील की है...उन्होंने सभी सामान्य कैटेगरी के बिजनेसमैन से कहा है, अपने कॉलेज, अस्पताल और होटल में SC और ओबीसी वर्ग को एंट्री न दें, जब तक कानून वापस नहीं होता भाईचारा नहीं निभाएंगे...
तो सवाल ये उठता है क्या कॉलेज-यूनिवर्सिटी में भेदभाव खत्म करने के नाम पर समाज में दुश्मनी फैलाने का काम किया जा रहा है....और ये काम कौन कर रहा है...ये कानून देशभर के लिए है, फिर विरोध यूपी में ही सबसे ज्यादा क्यों हो रहा है, बीजेपी के 11 पदाधिकारी इस नए कानून के विरोध में इस्तीफा दे देते हैं...
इस्तीफे में साफ लिखते हैं ये कानून लागू करके हमारे सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है...बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह इस पर टिप्पणी करने से अभी इनकार कर देते हैं, जबकि उनके बेटे और गोंडा से विधायक प्रतीक भूषण सिंह लिखते हैं, ''इतिहास के दोहरे मापदंडों पर अब गहन विवेचना होनी चाहिए जहाँ बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के भीषण अत्याचारों को ‘अतीत की बात’ कहकर भुला दिया जाता है, जबकि भारतीय समाज के एक वर्ग को निरंतर ‘ऐतिहासिक अपराधी’ के रूप में चिन्हित कर वर्तमान में प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है.''
हालांकि प्रतीक भूषण की इस टिप्पणी पर भी सवाल उठते हैं, लोग उस कमेटी की लिस्ट ले आते हैं, जिसकी भूमिका इस यूजीसी इक्विटी बिल में रही है, और उसमें इनके बड़े भाई कऱण भूषण सिंह का नाम भी 28वें नंबर पर नजर आता है...शायद यही वजह है कि कोई भी नेता कुछ बोलने से बच रहा है, मीडिया में खुलकर न समर्थन न कर रही, न विरोध...लेकिन यूपी में इस बात की चर्चा तेज है कि योगी आदित्यनाथ को ये बिल भारी पड़ सकता है...क्योंकि टाइमिंग पर नजर डालें तो एक तरफ इस बिल के खिलाफ सवर्णों का विरोध है, यूपी में तेज होता प्रदर्शन है, तो दूसरी तरफ शंकराचार्य और वृंदावन में हुई ब्राह्मणों के साथ मारपीट की घटना है, जिसे लेकर कई लोग योगी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं...पर योगी ने साफ कहा है सनातन को बदनाम करने वाले कई कालनेमि हैं, उनसे सावधान रहना होगा...
यानि चर्चाएं कई हैं, पर आखिर में आपको उस बिल की कॉपी जरूर देख लेनी चाहिए, जिसने सवर्णों के विरोध को नई हवा दे दी है... ये यूजीसी के बिल की वो कॉपी है, जिसे लेकर कोई इस्तीफा दे रहा तो कोई विरोध के सुर मजबूत कर रहा है... इसमें साफ-साफ लिखा है SC, ST और OBC के खिलाफ जाति के आधार पर भेदभाव है, जिसे रोकने के लिए कॉलेज, यूनिवर्सिटी में समता समिति और समता हेल्पलाइन बनाई जाएगी...
लेकिन इसी बिल में ये भी प्रावधान है कि सवर्ण वर्ग के छात्र के खिलाफ अगर कोई शिकायत होती है तो उसके खिलाफ कड़ा एक्शन होगा.. फिर सवाल है बिना वकील और बिना दलील कैसे किसी को दोषी बताया जा सकता है... इसी बात का विरोध सवर्ण समाज के लोग सड़कों पर उतरकर कर रहे हैं... आप इस नए बिल को कैसे देखते हैं...