नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर चर्चा के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कुछ ऐसी टिप्पणी की, जो चर्चा का विषय बन गई. CJI ने सिब्बल से कहा, “ज्यादा मत बोलिए और इस मामले में अभी बहस न करें. वरना, दूसरी तरफ से भी बहस होगी. इसे पहले लिस्ट होने दीजिए.”
मामला तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच विवाद का है. चुनाव आयोग ने दोनों गुटों द्वारा ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. ममता बनर्जी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ममता बनर्जी की ओर से CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष खड़े हुए.
उन्होंने मामले की तुरंत सुनवाई और आयोग के आदेश पर रोक लगाने की मांग की. सिब्बल ने कहा, “पार्टी आयोग में कार्यवाही जून में शुरू हुई थी और जुलाई में जवाब दाखिल किया गया था, लेकिन चुनाव का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद आयोग ने चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया. बहुत अजीब चीजें हुई हैं. हमें समझ नहीं आ रहा कि ऐसा कैसे हुआ.” इसी दौरान CJI सूर्यकांत ने सिब्बल को टोकते हुए उपरोक्त टिप्पणी की. इसके बाद सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग नए-नए रिकॉर्ड बना रहा है. CJI ने मामले को लिस्ट करने का आदेश दे दिया. शीर्ष अदालत ममता बनर्जी की याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए सहमत हो गई है. याचिका में ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को प्रतिवादी बनाया है.
क्या है पूरा मामला?
निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों (ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले) के बीच विवाद पर अंतिम निर्णय होने तक दोनों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम इस्तेमाल करने पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी थी. शुक्रवार को दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए. आयोग ने कहा था कि इस मामले में निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के प्रावधानों के तहत विस्तृत निर्णय की जरूरत है. ममता बनर्जी ने इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.