...जिस जगह पर कभी डी कंपनी के गुर्गे रहते थे. किसी को पता नहीं था कौन सी गली से कौन निकल आए? वहां जब देवा भाऊ का बुलडोजर पहुंचा तो हड़कंप मच गया. बुर्के वाली महिलाएं चीख-पुकार मचाने लगी. कोई बुलडोजर के आगे लेटने की बात कहने लगा, तो कोई कह रहा था पुलिस प्रशासन को यहां से भगा देंगे. लेकिन कोर्ट के आदेश का पालन करवाने गई पुलिस भी बड़ी तैयारी के साथ गई थी. तस्वीरों में आप देख सकते हैं कैसे सुरक्षाकर्मी महिलाओं और पुरुषों को रोक रहे हैं.

एक बार जब बुलडोजर का इंजन स्टार्ट होता है, तो वो किसी की करुण पुकार सुनकर रुकता नहीं, बल्कि गरजता चला जाता है और एक साथ 34 घरों को ढहा देता है, जिसे देखने के बाद कई लोग कहते हैं मुंबई से डी कंपनी का नामोनिशान मिट गया. लेकिन जिन गरीबों के साथ बड़े-बड़े बिल्डर ने धोखा किया, वो सड़क पर आ चुके हैं, घर टूटने के बाद कोई खुले आसमान के नीचे छाता लगाकर बैठा है, तो बर्तन-भांडा लेकर सड़कों पर है, मीडिया के कैमरे पर एक टैक्सी ड्राइवर कहता है गरीब की सुनने वाला कोई नहीं है.
लेकिन ये लोग इतने बड़े जाल में फंस कैसे, 10-15 साल से जब बिजली-पानी हर चीज का बिल दे रहे थे, तो कोर्ट ने इनके घरों पर बुलडोजर चलाने का आदेश क्यों दे दिया, और इस इलाके का अंडरवर्ल्ड से क्या नाता है, जरा समझिए...
जिस जगह पर बुलडोजर चला है, वो नालासोपारा इलाके का लक्ष्मनीगर है, जहां डंपिंग ग्राउंड यानि कूड़ा फेंकने और एसीटीपी प्लांट के लिए जमीन आरक्षित थी. लेकिन भूमाफियाओं ने मिलीभगत से यहां बिल्डिंग बनवा दी, जिसे कईयों ने किराये पर लिया तो वहीं कईयों ने लाखों रुपये देकर खरीदा, पर मामला जैसे ही बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा, अदालत ने इन इमारतों को अवैध घोषित कर दिया, नवंबर 2024 में पहले 7 इमारतें टूटी, उसके बाद स्थानीय विधायक राजन नाईक ने इसका मुद्दा सदन में उठाया तो कुछ दिनों के लिए शांति हुई, पर नगरपालिका ने 22 जनवरी को दोबारा से बुलडोजर एक्शन का प्लान तैयार कर लिया.
नतीजा जिन घरों में किलकारियां गूंजती थी, वो जमींदोज हो गया, 400 पुलिसकर्मी और करीब 150 कर्मचारियों ने अवैध कब्जे का कोना-कोना तोड़ डाला, बिल्डिंग ऐसी-ऐसी थी कि कार्रवाई में प्रशासन को कई दिन लग गए. चूंकि महाराष्ट्र का नालासोपारा एरिया पहले से संवेदनशील रहा है, डोंगरी में जन्मा दाऊद इस इलाके से लोगों को अपने गैंग में भर्ती करता था, इसलिए इस इलाके का अपना एक अलग इतिहास है. अभी भी यहां हालत ऐसी है कि कई बांग्लादेशी अवैध रूप से छिपे थे. जिसकी जानकारी वहां की डीएसपी पूर्णिमा चौगुले श्रृंगी देती हैं.
वो साफ कहती हैं, ये कार्रवाई नहीं रुकेगी, जिसका मतलब है दाऊद के गढ़ में देवा भाऊ का बुलडोजर अभी थमने वाला नहीं है, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस का साफ आदेश है कानून व्यवस्था को बिगाड़ने की जो भी कोशिश करे, उसे हर हाल में सलाखों के पीछे पहुंचाओ, आज जिनकी तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जो मीडिया के कैमरे के सामने रो रहे हैं क्या उनकी कोई गलती नहीं है. इस खेल में नगर निगम से लेकर नक्शा पास करवाने वाले अवैध बिल्डिंग बनने देने वाले अधिकारी जितने जिम्मेदार हैं, उतने ही वो लोग भी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने अपनी जिंदगी की पूरी जमापूंजी लगाने से पहले एक बार भी नहीं सोचा कि हम जो मकान खरीद रहे हैं, वो सही जगह है या नहीं.
हम ये नहीं कहते जहां भी बुलडोजर चल रहा वो सही है, लेकिन अवैध कब्जे पर बुलडोजर अगर नहीं चलेगा तो जरा सोचिए, क्या इस देश के भूमाफिया किसी भी जगह को खाली बचने देंगे, कुछ दिनों पहले ही गाजियाबाद से सेना की जमीन का कब्जा खाली करवाने की तस्वीरें सामने आई थी, जो भूमाफिया सेना की जमीन तक नहीं छोड़ रहे, क्या उनके आकाओं की फाइल पुलिस को नहीं खोलनी चाहिए, बुलडोजर से मकान गिरता है, तो पूरा परिवार रोता है, लेकिन एक माफिया जो ऐसे मकान बनवाता है, उसे कौन रुलाएगा, सवाल गंभीर है, सोचिए और जवाब दीजिए.