दिल्ली: कुणाल की उम्र सिर्फ 17 साल थी, लेकिन देश में लगी धर्म की चिंगारी में उसकी जान चली गई! दिल्ली का सीलमपुर कहां है? और क्यों बीजेपी की सरकार में यहां के हिन्दुओं को डर लग रहा है? घर के बाहर लगे पोस्टर गवाही देते हैं कि योगी की मांग कोई बड़ा इशारा करती है! हम परत दर परत कुणाल केस की फाइल खोलेंगे. आपको समझाएंगे कैसे कुणाल धर्म की आग से खुद को नहीं बचा पाया? 17 साल के कुणाल का कोई दोष नहीं था. वो घर से दूध लेने निकला लेकिन कभी नहीं लौटा.
15 सालों तक दिल्ली में कांग्रेस की सरकार रही, ठीक उसके बाद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने. और इन्हीं 25 सालों में दिल्ली का सीलमपुर देश की राजधानी का मिनी पाकिस्तान कहा जाने लगा! सीलमपुर में 100 से ज्यादा मस्जिदें हैं! यहां बांग्लादेशी भी आसानी से छिप जाता है, और संभल हिंसा के बाद पुलिस सीलमपुर तक जांच करती है! महिलाएं हाथ में पोस्टर लेकर खड़ी हैं, जिसमें लिखा है हिन्दू पलायन कर रहा है, एक घर के बाहर पोस्टर लगा था, जिसमें लिखा था हिन्दू पलायन कर रहा है, मोदीजी, योगी जी बचा लीजिए. यही कहानी संभल की थी. यही कहानी मुजफ्फरनगर की थी. यही कहानी हर उस शहर की क्यों होती है, जहां संख्या में हिन्दू कम होते हैं?
सीलमपुर में कई परिवारों ने महंगे दाम पर खरीदा, लेकिन इसी डर के कारण उन्होंने सस्ते में मकान बेचा!
संभल हो या सीलमपुर जब कोई हिन्दू अपना मकान बेचता है तो उसका खरीददार मुस्लिम ही क्यों होता है?
दिल्ली के सीलमपुर पर पाकिस्तान से लेकर बांग्लादेश तक की नज़र बनी है, घनी बस्तियों का सच कड़वा है
दरअसल कुणाल की हत्या हुई तो केस बाहर आया, लेकिन इन गलियों में कई परिवार हैं जिनका दर्द छिपा है
छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा होना, उस झगड़े का बदला लेना. हिन्दू पक्ष का कहना है कि संख्या कम होने के कारण यहां रहने में समस्या है? लेकिन ये तो देश की राजधानी है? यहां क्या दिक्कत हुई? तो इस सवाल का जवाब योगी देते हैं? सीलमपुर की रहने वाली जिकरा नाम की एक लड़की गैंग चलाती है, उसकी गैंग में सीलमपुर के ही कई नाबालिग लड़के शामिल हैं, पुलिस जांच और पूछताछ में ये भी पता चला है कि कुणाल की बकायदा रेकी की गई, उसका पीछा किया गया, लेकिन क्राइम का मोटिव क्या है? कुणाल को क्यों मारा? क्या वजह थी?
देश के अलग-अलग हिस्सों में कई दिनों से माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है, जैसे आगरा की जामा मस्जिद में एक बैग में मांस मिलना... बंगाल में हिन्दुओं पर हमला... दिल्ली के सीलमपुर में कुणाल जो निर्दोष है उसका किसी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं था फिर भी चाकुओं से हमला होना? क्या इशारा करता है? दिल्ली पुलिस की पूछताछ में लेडी डॉन जिकरा ने चौंका देने वाला खुलासा किया है, जिसमें वो बताती है कि कुछ समय पहले उसके कज़न साहिल पर एक हमला हुआ था. उसमें कुणाल के दो दोस्त शामिल थे. उस हमले में कुणाल भी शामिल था, हालांकि वो नाबालिग था तो उसका नाम FIR में नहीं आया है. तो क्या ये बदले से जुड़ी घटना है, फिलहाल जिकरा को पुलिस ने पूछताछ के बाद छोड़ दिया, उसके घर के नीचे पुलिस मुस्तैद है, उसकी हर हरकत पर नजर रख रही है, यही दर्द ज्यादातर हिन्दुओं का है, इसलिए सीलमपुर से जाना ही बेहतर समझा है! क्योंकि छोटी-मोटी लड़ाइयां आम बात हैं. लेकिन अगर कोई उसपर बदले का प्लान बनाए तो बेहद ख़तरनाक कहा जाएगा!
देश की हालत देखिए इसी दिल्ली के पास साल 2016 में ग्रेटर नोएडा में एक मुस्लिम की मौत हुई तो केजरीवाल चेक लेकर गए देने के लिए, अखिलेश यादव ने बिना मांगे ही फंड जारी कर दिया, लेकिन कुणाल की मौत वाले दिन केजरीवाल अपनी बेटी की शादी में डांस कर रहे थे, अखिलेश यादव की ख़ामोशी, राहुल गांधी की चुप्पी क्या इशारा करती है? रिपोर्ट्स दावा करती हैं कि सीलमपुर में 60 फीसदी वोटर मुस्लिम हैं. बीजेपी दिल्ली तो जीती लेकिन सीलमपुर हार गई, यहां से आम आदमी पार्टी के मुस्लिम नेता चौधरी जुबैर ने चुनाव भी जीता. सवाल सिर्फ इतना है कि दिल्ली देश की राजधानी है और राजधानी की ये हालत है तो मुर्शिदाबाद का असली सच कैसा होगा? देश के नेताओं की चुप्पी क्या इशारा करती है? रेखा गुप्ता बेशक एक्शन का दावा कर रही हैं, लेकिन देश के हर हिस्से में योगी से मांग हो रही है? मुर्शिदाबाद की तस्वीर के बाद तो खुद बंगाल बीजेपी योगी की मांग कर रही है? तो फिर सवाल है अगर योगी मॉडल ही देश को चाहिए तो कुणाल के कातिलों का इलाज योगी से मॉडल से क्यों नहीं होना चाहिए?