18वीं लोकसभा चुनाव के परिणाम सामने आए जिसमें भाजपा के नेतृत्तव वाले एनडीए को 291 सीट मिली. वहीं खालिस्तानी अलगाववादी अमृतपाल सिंह खडूर साहिब लोकसभा सीट और शेख अब्दुल रशीद कश्मीर घाटी के बारामुल्ल से निर्वाचित हुए, जिसके बाद यह यह सवाल उठने लगा है कि क्या वे दोनों संसद के सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं या नहीं.
बता दें कि अमृतपाल सिंह मार्च 2023 से एनएसए (NSA) के तहत असम के डिब्रूगढ़ की जेल में हैं. NSA एक ऐसा कानून है जो सरकार को औपचारिक रूप से आरोप लगाए बिना 12 महीने तक व्यक्ति को हिरासत में रखने की इजाजत देता है. राशिद इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है. वह आतंकी फंडिंग मामले में यूएपीए के तहत आरोप लगाए गए हैं. पूर्व विधायक राशिद ने आवामी इत्तेहाद पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था.
दोनों की चुनावी जीत का मतलब यह है कि अब जेल में रहने के बावजूद उनके पास सांसद के रूप में संवैधानिक तौर पर जनादेश है. शपथ लेना सांसदों के रूप में अपनी भूमिका निभाने का पहला कदम है. इतिहास में कई ऐसे उदाहरण हैं जिनमें जेल में बंद कई सांसदों को शपथ लेने के लिए अस्थायी तौर पर पैरोल दी गई है. मार्च के महीने में आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह को भी अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने के लिए कोर्ट ने इजाजत दी थी.
वह मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद थे. एक ट्रायल कोर्ट ने जेल सुपरिटेंडेंट को यह तय करने का भी आदेश दिया था कि उन्हें पुख्ता सुरक्षा के साथ संसद ले जाया जाए और वापस जेल लाया जाए. ऐसा ही एक और उदाहरण साल 2021 में भी देखने को मिलता है. असम के सिबसागर से जीतने के बाद एनआईए की कोर्ट ने अखिल गोगोई को असम विधानसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए अस्थायी रूप से जेल से बाहर आने की इजाजत दी थी.
वहीं, ट्रेड यूनियनिस्ट जॉर्ज फर्नांडीस ने 1977 में जेल से चुनाव लड़ा था. आपातकाल के दौरान जेल में रहते हुए मुजफ्फरपुर सीट से चुने गए थे. शपथ ग्रहण समारोह से पहले उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया.