Vagdevi Worship Bhojshala: मध्य प्रदेश की भोजशाला में हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब नियमित पूजा-पाठ का सिलसिला शुरू हो गया है. रविवार को दूसरी बार हिंदू समाज के हजारों लोग ढोल-नगाड़ों और भजनों के साथ भोजशाला पहुंचे. उन्होंने मां वाग्देवी (सरस्वती) की प्रतिकात्मक प्रतिमा सिर पर रखकर लाई और वहां यज्ञशाला को सजाकर पूजा-अनुष्ठान किया.
इस मौके पर कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा भी कुर्ता-पजामा पहनकर पूजा में शामिल हुए. शनिवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचकर पूजा-अर्चना कर चुके हैं.
हाईकोर्ट का फैसला और ASI का नया आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भोजशाला मामले पर लंबे समय से चले विवाद का फैसला सुनाया. कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर माना, लेकिन इसे ASI के संरक्षण में रखने का भी आदेश दिया. इस फैसले के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने शनिवार शाम को नया आदेश जारी कर पुराना 2003 वाला आदेश रद्द कर दिया. नए आदेश में भोजशाला को देवी वाग्देवी का मंदिर और संरक्षित स्मारक बताया गया है.
2003 का पुराना आदेश क्या था?
2003 में ASI ने दोनों समुदायों को सीमित अधिकार दिए थे. हिंदू समाज को केवल मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा की इजाजत थी, जबकि मुस्लिम समुदाय शुक्रवार को नमाज पढ़ सकता था. इस साल जब बसंत पंचमी और जुम्मा एक ही दिन (23 जनवरी 2026) पड़े, तब विवाद और बढ़ गया था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.
ASI सर्वे में क्या-क्या मिला?
ASI ने लगभग ढाई साल पहले भोजशाला का विस्तृत सर्वेक्षण किया था. 98 दिनों तक चले वैज्ञानिक परीक्षण में कई महत्वपूर्ण प्रमाण. मंदिर के अवशेष, 106 खंभे और 82 प्लास्टर, देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां, 94 मूर्तियों के निशान, परमार काल के शिलालेख, पारिजातमंजरी नाटिका का उल्लेख
यज्ञकुंड, नृत्य मुद्राएं, वासुकी नाग और शिव की मूर्ति मिले.
संस्कृत-देवनागरी लिपि में अभिलेख
कुछ अरबी-फारसी लेख भी मिले. हाईकोर्ट ने ASI रिपोर्ट, दोनों पक्षों की दलीलें और लंबी सुनवाई के बाद 15 मई को फैसला सुनाया. अब भोजशाला में हिंदू समाज को बिना किसी रोक-टोक के पूजा-पाठ करने की अनुमति मिल गई है, जिससे वहां का नजारा पूरी तरह बदल गया है.