भोपाल: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की एक कोर्ट ने एक पूर्व वार्ड पार्षद को रेप के आरोपों से बरी कर दिया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता ने उसके खिलाफ आरोप इसलिए लगाए क्योंकि वह उसका घर गिरवाना चाहता था. हालांकि पूर्व वार्ड पार्षद शफीक अंसारी अब निर्दोष साबित हो चुके हैं, लेकिन अब उनके पास अपना घर नहीं है. मार्च 2021 में महिला द्वारा शिकायत दर्ज कराने के 10 दिन से भी कम समय में प्रशासन ने उनके घर को बुलडोजर से गिरा दिया था. पूर्व पार्षद ने मीडिया को बताया कि मैंने अपनी मेहनत की कमाई से 4,000 वर्ग फीट जमीन पर घर बनाया था. शफीक अंसारी अपने घर को गिराए जाने के लिए न्याय की मांग करते हुए कोर्ट जाने की योजना बना रहे हैं.
अब, वहां केवल मलबा है. हम अपने भाई के घर में रह रहे हैं. भोपाल से लगभग 130 किलोमीटर दूर सारंगपुर नगर निगम के पूर्व पार्षद अंसारी ने कहा कि हमारे पास सभी कागजात थे. आरोप लगाया गया था कि घर बिना अनुमति के बनाया गया था, लेकिन हमें रिकॉर्ड दिखाने या कुछ भी कहने का मौका नहीं दिया गया. इसे बस तोड़ दिया गया. मेरा सात लोगों का परिवार है. वे सभी पीड़ित थे. मैं तीन महीने के लिए जेल गया था.
4 मार्च 2021 में महिला की शिकायत के अनुसार, पूर्व पार्षद ने 4 फरवरी 2021 को उसके बेटे की शादी में मदद करने के बहाने उसे अपने घर बुलाया और उसके साथ रेप किया. वहीं 13 मार्च 2021 को पूर्व पार्षद का घर गिरा दिया गया. शफीक ने कहा कि सुबह 7 बजे प्रशासन बुलडोजर लेकर पहुंचा और इससे पहले कि मेरे परिवार के सदस्य कुछ समझ पाते, मेरा घर खंडहर हो चुका था. मैं उस समय फरार था. मैंने अगले दिन आत्मसमर्पण कर दिया.
मामले में इसी साल 14 फरवरी को फैसला आया. राजगढ़ जिले के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चित्रेंद्र सिंह सोलंकी ने फैसला सुनाने से पहले महिला और उसके पति की गवाही में काफी विसंगतियां पाईं. कोर्ट ने पाया कि हालांकि उसके घर के पास एक पुलिस स्टेशन है, लेकिन उसने कथित रेप की तुरंत रिपोर्ट नहीं की. कोर्ट ने कहा कि अपने बेटे की शादी के 15 दिनों तक उसने न तो अपने पति या अपने किसी बेटे को कथित अपराध के बारे में बताया और इस देरी का कोई कारण भी नहीं बताया. आदेश में कहा गया है कि शिकायतकर्ता के नमूनों में कोई मानव शुक्राणु नहीं पाया गया, जिससे यह निष्कर्ष निकला कि नैदानिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों से रेप की पुष्टि नहीं हो सकी.