| • नेपाल से सटे 10 जिलों में ताबड़तोड़ एक्शन • उत्तर प्रदेस सरकार ने उतारे दर्जनों बुलडोजर • जानिए क्या है सीएम योगी आदित्यनाथ का प्लान • 144 घंटे में 350 अवैध कब्जे पूरी तरह जमींदोज • अब तक नेपाल बॉर्डर से सटे 85 मदरसे हुए सील • गृहमंत्री शाह तक पहुंची भयंकर खुफिया रिपोर्ट |

...ये उत्तर प्रदेश का नक्शा है, जहां के 7 जिलों की सीमाएं नेपाल से लगती हैं, औऱ इन्हीं 7 जिलों पर योगी आदित्यनाथ की इन दिनों नजर है, बीते करीब 6 दिनों से यहां बुलडोजर एक्शन चल रहा है. अब तक 85 मदरसे, दर्जनों अवैध मस्जिदें, दरगाह समेत 350 कब्जों को खाली कराया जा चुका है, जिसके बाद लोग ये पूछ रहे हैं कि जिस वक्त कार्रवाई पाकिस्तान की सीमा पर होनी थी, उसी वक्त नेपाल बॉर्डर पर इतना भयंकर एक्शन क्यों हो रहा है, योगी आदित्यनाथ के इस आदेश के क्या मायने हैं कि नेपाल बॉर्डर से सटे 10-15 किलोमीटर के इलाके में कोई भी अवैध निर्माण या घुसपैठिया नहीं होना चाहिए, तो इसे समझने के लिए उस खुफिया रिपोर्ट को समझना होगा, जो 4 साल पहले यूपी सरकार ने गृहमंत्रालय को भेजा था.
रिपोर्ट में क्या था
इसका सीधा सा मतलब है, इन जिलों में घुसपैठ हुई है, लेकिन बांग्लादेशी घुसपैठिए तो बंगाल के रास्ते भारत में घुसते हैं, फिर नेपाल सीमा से घुसपैठ कौन कर रहा है, और कैसे कर रहा है, तो इसकी भी तीन तरीके की कहानी है.
अभी चूंकि गृहमंत्रालय के आदेश पर पाकिस्तानियों को ढूंढ-ढूंढकर वापस भेजा जा रहा है, और असम से लेकर कई राज्यों तक में घुसपैठियों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, तो योगी की पुलिस न सिर्फ घुसपैठियों को पकड़ बल्कि उनके अवैध ठिकानों को भी जमींदोज कर रही है, ताकि कोई और ऐसी हिमाकत न कर पाए, समय-समय पर गृह मंत्रालय खुद यूपी सरकार से इस बात के रिकॉर्ड मांगता रहता है कि बॉर्डर से सटे इलाकों की भौगोलिक स्थिति क्या है, वहां की गतिविधियां सामान्य है या नहीं.
चूंकि नए लोग जो घुसपैठ करके आते हैं, वो वहां के स्थानीय लोगों की मदद से भारत के फर्जी दस्तावेज भी तैयार करवा लेते हैं, जिन्हें एक नजर में पकड़ना पुलिस के लिए आसान भी नहीं होता, और यहीं रह रहे लोग उन्हें अपना जानकार बताकर सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देने की कोशिश करने लगते हैं, यही वजह है कि इन इलाकों में अब एक्शन तेज हो गया है. और बाबा को बुलडोजर ने एक नई पहचान दिलाई है, इसीलिए कहीं भी कुछ भी होता है तो बुलडोजर की मांग पहले उठने लगती है, और सोशल मीडिया पर तो कई लोग अभी से कहने लगे हैं कि अगर बाबा दिल्ली में होते तो पाकिस्तान का इलाज करने में इतना वक्त नहीं लगता.