झांसी: उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक एमएलसी चुनाव में कुल 1,09,482 मतपत्रों में से 9,596 अवैध पाए गए. यानी करीब 8.76 फीसदी मतपत्रों पर दर्ज मत गिनती में शामिल नहीं हो सके. हर 100 मतपत्रों में लगभग नौ रद्द हो गए. स्नातक एमएलसी चुनाव में मतदान सामान्य चुनाव से अलग होता है. मतदाताओं को उम्मीदवारों के सामने अंकों में अपनी वरीयता दर्ज करनी होती है.
नियमों के मुताबिक सही तरीके से वरीयता न लिखने पर मतपत्र अवैध हो जाता है. मतगणना के दौरान कई मतदाताओं ने वरीयता के बजाय हस्ताक्षर कर दिए, टिक का निशान लगा दिया या मतपत्र खाली छोड़ दिए. दिलचस्प बात यह रही कि कुछ मतपत्रों पर “यूजीसी रोलबैक” जैसे संदेश भी लिखे मिले. इन मतदाताओं ने अपनी नाराजगी दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन उनके मत गणना में शामिल नहीं हो सके.
चुनाव में सपा और भाजपा के प्रत्याशियों के अलावा 11 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में थे. इन सभी निर्दलीय प्रत्याशियों को मिले कुल मतों की संख्या अवैध मतपत्रों से कम रही. सपा प्रत्याशी डॉ. मान सिंह यादव के नाम से मिलते-जुलते नाम वाले निर्दलीय प्रत्याशी मान सिंह यादव को केवल 829 मत मिले. मतदान से ठीक पहले भाजपा प्रत्याशी को समर्थन देने वाले निर्दलीय राहुल कनकने को महज 66 मत मिले.
सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने यह सीट अपने पास बरकरार रखी. उन्होंने भाजपा के अशोक कुमार राठौर को 27,663 मतों के अंतर से हराया और 60,358 मत हासिल किए. अवैध मतों की इतनी बड़ी संख्या स्नातक मतदाताओं में भी मतदान प्रक्रिया को लेकर भ्रम और जागरूकता की कमी को उजागर करती है.