विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह में दिव्यांगजनों के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए प्रदेश में दिव्यांग बच्चों के विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि दृष्टिबाधित, मूक बधिर और अन्य श्रेणी के दिव्यांग बच्चों के लिए स्कूलों की संख्या में वृद्धि आवश्यक है, ताकि उनकी पूरी प्रतिभा समाज, देश और दुनिया तक पहुंच सके.
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2017 तक केवल सात से आठ लाख दिव्यांगजनों को हर महीने 300 रुपये पेंशन मिलती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 1000 रुपये किया गया है, और आज 11 लाख दिव्यांगजन इसका लाभ उठा रहे हैं. पेंशन सीधे उनके खाते में जाती है, जिससे मध्यस्थता की प्रक्रिया समाप्त हो गई है.
योगी आदित्यनाथ ने दिव्यांगजनों के सम्मान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की भी सराहना की, जिन्होंने 'दिव्यांग' शब्द को अपनाकर उन्हें नई प्रेरणा दी. उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों में अपार प्रतिभा है, जिसका सही अवसर मिलने पर वह देश और दुनिया में अपनी छाप छोड़ सकते हैं, जैसे पेरिस पैरा ओलंपिक में हमारे दिव्यांगजनों ने शानदार प्रदर्शन किया.
मुख्यमंत्री ने दिव्यांगता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 19 लोगों को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया और 46 मेधावी छात्रों को भी सम्मानित किया. इसके अलावा, 40 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण प्रदान किए गए.
मुख्यमंत्री ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि सरकार पेंशन, संस्थान और सुविधाएं देने के साथ-साथ समयबद्ध निर्णय लेकर तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है ताकि दिव्यांगजनों को बेहतर अवसर मिल सकें.