नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी. 45 पन्नों के इस घोषणापत्र में वैश्विक संघर्ष, आतंकवाद, व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे कई अहम मुद्दों पर BRICS देशों का साझा रुख सामने आया है. घोषणापत्र में निष्पक्ष और समावेशी वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है.
संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत पर जोर
BRICS देशों ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों पर चिंता जताई और विवादों के समाधान के लिए बातचीत, कूटनीति और परामर्श का रास्ता अपनाने पर जोर दिया. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच घोषणापत्र में अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई है.
आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश
घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है. BRICS ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर जोर देते हुए आतंकियों की फंडिंग और उन्हें मिलने वाले सुरक्षित ठिकानों से निपटने की आवश्यकता बताई. साथ ही पहलगाम आतंकी हमले की भी कड़ी निंदा की गई.
एकतरफा टैरिफ और प्रतिबंधों का विरोध
BRICS देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापारिक उपायों पर चिंता जताई. घोषणापत्र में कहा गया कि ऐसे कदम वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं और WTO के नियमों के अनुरूप निष्पक्ष एवं नियम आधारित व्यापार व्यवस्था की जरूरत है. BRICS ने WTO में व्यापक सुधार का भी समर्थन किया.
ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर
घोषणापत्र में विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की वैश्विक संस्थाओं में भूमिका बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया. BRICS देशों ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार का समर्थन किया, ताकि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सके.
नवीकरणीय ऊर्जा और निष्पक्ष आर्थिक सहयोग
इस साल के घोषणापत्र का मुख्य विषय नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना रहा. BRICS ने टिकाऊ ऊर्जा बदलाव और सदस्य देशों के बीच अधिक न्यायसंगत आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई.
भारत के लिए अहम कूटनीतिक उपलब्धि
नई दिल्ली घोषणापत्र पर सर्वसम्मति को भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है. अलग-अलग वैश्विक मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेदों के बावजूद साझा दस्तावेज पर सहमति बनना BRICS की सामूहिक भूमिका को रेखांकित करता है.