बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, उनके बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को लैंड फॉर जॉब मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट से समन मिला है. कोर्ट ने इन्हें 7 अक्टूबर को पेश होने के लिए कहा है. इसके साथ ही, एके इन्फोसिस लिमिटेड (AK Infosys Limited) के निदेशक अखिलेश्वर सिंह और उनकी पत्नी किरण देवी को भी समन भेजा गया है.
दरअसल यह मामला रेलवे में ग्रुप-D की नियुक्तियों से संबंधित है, जो मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित पश्चिम मध्य रेलवे क्षेत्र में 2004 से 2009 के बीच हुई थीं. इस दौरान लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे. आरोप है कि नियुक्ति के बदले में कुछ लोगों ने आरजेडी सुप्रीमो के परिवार या सहयोगियों के नाम पर भूमि के टुकड़े दिए या स्थानांतरित किए. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस संदर्भ में जांच की है.
इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने एक व्यवसायी अमित कट्याल को चिकित्सा कारणों से नियमित जमानत दी थी. उन पर भूमि के बदले मनी लॉंड्रिंग का आरोप है. कट्याल को नवंबर 2023 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में हैं. उनकी सेहत ठीक नहीं थी, और उन्होंने सर्जरी भी करवाई थी. आपको बता दें, इस मामले में तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव और अन्य के खिलाफ समन पर राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सुनवाई जारी रखी है. इसमें तेजस्वी यादव के लिए यह मामला विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह उनके राजनीतिक करियर पर भी असर डाल सकता है.
गौरतलब हो लैंड फॉर जॉब मामले मे मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप मे लालू और तेजस्वी, तेजप्रताप यादव के खिलाफ ईडी ने पहले सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है. लैंड फॉर जॉब मामले में ये पहली बार है जब तेजप्रताप यादव को समन भेजा गया. कोर्ट का मानना है कि मामले में मुकदमा चलाने के लिए प्रथम दृष्टया में पर्याप्त सबूत हैं. कोर्ट ने ये कहा कि, बड़ी तादाद में ज़मीन का ट्रासंफर हुआ, इसके साथ ही यादव परिवार द्वारा पद का दुरुपयोग किया गया था.
इस मामले में और भी कई नाम शामिल हैं, जैसे धीरेंद्र कुमार, रविंदर कुमार, समेत कई और लोग. प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 6 अगस्त को एक पूरक आरोप पत्र दायर किया गया था, जिसमें 96 अतिरिक्त दस्तावेज शामिल थे. राजनीति में ऐसी घटनाएं अक्सर होती हैं, जहां नेताओं को कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. तेजस्वी और तेज प्रताप यादव का इस मामले में समन प्राप्त करना उनकी राजनीतिक छवि पर असर डाल सकता है. इस मामले की आगामी सुनवाई पर सभी की निगाहों रहेगी. यह देखना होगा कि क्या ये आरोप उनके करियर को प्रभावित करेंगे या नहीं. इस तरह, भूमि के लिए नौकरी मनी लॉन्डरिंग का यह मामला बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है. जनता और राजनीतिक विश्लेषक इस मामले पर करीबी नजर रख रहे हैं.