Hariyana News : IVF तकनीक को संतान सुख का सबसे बड़ा सहारा माना जाता है, लेकिन जब इसी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगें तो उम्मीद की जगह डर पैदा हो जाता है. गुरुग्राम के एक दंपति ने दावा किया है कि IVF के जरिए जन्मीं उनकी जुड़वा बच्चियों का DNA उनसे मेल नहीं खाता, जिससे भ्रूण बदलने की आशंका जताई जा रही है. यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारत में IVF से जुड़ी कई कथित गड़बड़ियां पहले भी सुर्खियां बन चुकी हैं. हैदराबाद में बेबी मिक्स-अप, तेलंगाना में स्पर्म सैंपल विवाद और दिल्ली में स्पर्म मिक्स-अप के मामले IVF क्लीनिकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर चुके हैं.
गुरुग्राम के एक दंपति ने आईवीएफ (IVF) प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर भ्रूण बदल जाने का गंभीर आरोप लगाया है. जनवरी 2026 में जुड़वा बच्चियों के माता-पिता बने राहुल राठौर और उनकी पत्नी मीनू राठौर का दावा है कि डीएनए जांच में यह सामने आया कि दोनों बच्चियां जैविक रूप से उनकी संतान नहीं हैं. मामले ने अब कानूनी और सामाजिक स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है.
राहुल राठौर के अनुसार, उन्होंने संतान प्राप्ति की उम्मीद में वर्ष 2025 में आईवीएफ तकनीक का सहारा लिया था. द्वारका स्थित एक अस्पताल की सलाह पर उन्होंने दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में स्थित एक इनफर्टिलिटी क्लिनिक में इलाज शुरू कराया. दंपति का कहना है कि डॉक्टरों ने उन्हें आश्वस्त किया था कि भ्रूण उनके ही स्पर्म और एग से तैयार किया जाएगा.
बताया गया कि 14 मई 2025 को मीनू राठौर के गर्भ में भ्रूण प्रत्यारोपित किया गया था, इसके बाद 5 जनवरी 2026 को उन्होंने जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया. परिवार में खुशियां थीं, लेकिन कुछ समय बाद बच्चियों की शक्ल-सूरत को लेकर दंपति को संदेह हुआ. राहुल और मीनू का कहना है कि बच्चियों का चेहरा उनसे मेल नहीं खा रहा था, जिसके बाद उन्होंने डीएनए टेस्ट कराने का फैसला किया.
दंपति का दावा है कि डीएनए रिपोर्ट में बच्चों का जैविक संबंध उनसे नहीं मिला, इसके बाद उन्हें आशंका हुई कि आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान किसी अन्य दंपति का भ्रूण गलती से मीनू राठौर के गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया गया.
राहुल राठौर ने कहा कि बच्चियां भले ही जैविक रूप से उनकी न हों, लेकिन वे उनकी परवरिश और देखभाल पूरी जिम्मेदारी से कर रहे हैं. उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. साथ ही आईवीएफ रिकॉर्ड, भ्रूण संबंधी दस्तावेज, लैब डेटा और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की अपील की है. इस मामले में दिल्ली की अदालत ने पुलिस को केस दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया है.
भारत में IVF से जुड़ी गड़बड़ियों के कई मामले सामने आ चुके हैं. इससे पहले हैदराबाद में कथित बेबी मिक्स-अप और तेलंगाना में दूसरे व्यक्ति के स्पर्म इस्तेमाल करने के आरोपों ने भी हड़कंप मचा दिया था. वहीं, दिल्ली के एक चर्चित मामले में स्पर्म मिक्स-अप को लेकर अस्पताल पर करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया गया था. इन घटनाओं ने IVF क्लीनिकों की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.