कोलकाता: इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (ISKCON) ने अपने कोलकाता यूनिट के वाइस प्रेसिडेंट राधारमन दास को सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है. साथ ही उन्हें मीडिया, सरकारी अधिकारियों या किसी भी सार्वजनिक मंच पर ISKCON की ओर से बोलने या प्रतिनिधित्व करने से रोक लगा दी गई है.
ISKCON ने रविवार को जारी एक मीडिया बयान में उन्हें "अनिवार्य अवकाश" पर भेज दिया. संगठन का कहना है कि यह कदम वर्षों से चली आ रही प्रक्रियात्मक उल्लंघनों, बिना अनुमति के कार्रवाई और संगठन की आधिकारिक लाइन के विपरीत रुख अपनाने के कारण उठाया गया है.
ISKCON का पक्ष
राधारमन दास का बयान
राधारमन दास ने फैसले का सम्मान करते हुए कहा, "मैं अधिकारियों द्वारा लिए गए फैसलों का सम्मान करता हूं और उन निर्देशों का पालन करूंगा." राधारमन दास पिछले कुछ वर्षों में ISKCON के सबसे मुखर चेहरों में से एक बन गए थे. वे बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति, सनातन धर्म और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर अक्सर सार्वजनिक रूप से बोलते रहते थे.
हालांकि दास इन सार्वजनिक हस्तक्षेपों को इस कार्रवाई से जोड़ते हैं, लेकिन ISKCON ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला उनके विचारों के बजाय संगठनात्मक अनुशासन भंग करने पर आधारित है. राधारमन दास ने अंत में कहा, "मैं इन वर्षों में मिले स्नेह और समर्थन के लिए आभारी हूं और ISKCON की निरंतर उन्नति की प्रार्थना करता हूं." यह घटना ISKCON जैसे बड़े धार्मिक संगठन में अनुशासन और आंतरिक प्रक्रियाओं के महत्व को रेखांकित करती है.