Yogi Adityanath Hindutva Strategy: सावन में हवा ने रूख बदला तो सियासत ने अपना रंग, ये UP है, यहां सियासी बिसात बिछ चुकी है, किसी को हरे रंग से प्यार है, कोई कांवड़ियों के साथ है. किसी को चाहिए भाईजान का वोट तो किसी का मुस्लिम सम्मेलन जारी है! योगी का कांवड़ प्रबंधन भी चुनावी लिहाज से हिट है! आख़िर UP में क्या चल रहा है? सत्ता का चक्र यूपी में अक्सर पांच साल बाद घूम जाता है, लेकिन योगी ने उसे बांधे रखा है, दूसरी बार जीतकर रिकॉर्ड बनाया, लेकिन क्या वो सत्ता का चक्र तीसरी बार भी रोक पाएंगे? या अखिलेश समय का पहिया घुमा पाएंगे? हिन्दुत्व का रास्ता, कांवड़ियों की तपस्या, छांगुर पर एक्शन, योगी का सनातन प्रेम, हिन्दुत्व के मुद्दे पर आती बीजेपी सत्ता से हटने को तैयार नहीं है! उधर चंद्रशेखर का मुस्लिम सम्मेलन साथ में दलितों पर मंथन, पैर जमाने का बड़ा ख़्वाब है. अखिलेश यादव का PDA कांवड़ में बेरंग है, लेकिन बकरीद का रंग खूब चढ़ा था. ईद पर रंग गहरा चढ़ेगा. PDA की दौड़ अभी पिछड़ों-दलितों की दहलीज़ से दूर, मुसलमानों के घर दस्तक दे रही है? यानि चुनावी मंच सज रहा है? चुनावी रंग में किस पर सावन का रंग चढ़ा है? एक-एक कड़ी समझिए! आख़िर मुस्लिम सम्मेलन, योगी का हिन्दुत्व पर लौटकर आना, अखिलेश का मुस्लिम प्रेम बढ़ना, चंद्रशेखर का दलितों से पहले मुसलमानों के लिए भिड़ना क्या कहता है?
“लखनऊ में मुस्लिम सम्मेलन होता है, चंद्रशेखर कहते हैं कांवड़ियों पर फूल और मुसलमानों पर लाठी ये नहीं चलेगा! संघर्ष का ऐलान करते हैं. लेकिन उन्हें मुस्लिम वोट क्यों चाहिए? क्या वो सपा पर दबाव की राजनीति कर रहे हैं, चंद्रशेखर ने सम्मेलन से आज़ादी का ऐलान कर दिया? उन्हें कैसी आज़ादी चाहिए?”
अखिलेश यादव को शक है कि क्या मुस्लिम वोटर उनके लिए वफ़ादारी दिखाएंगे, लोकसभा में प्रो मुस्लिम होने से समाजवादी पार्टी बचती रही, सिर्फ 4 टिकट दिया, लेकिन विधानसभा चुनाव में मुसलमानों का पूरा वोट चाहिए! इसलिए अखिलेश यादव मुसलमानों की पैरवी खुलकर कर रहे हैं? क्या अखिलेश यादव को मुसलमान अपना वफ़ादार नेता मानेगा? और उनपर यक़ीन करेगा ? यही वो सवाल हैं जहां टिका है सत्ता का सबसे बड़ा सवाल!
योगी फिलहाल खली और महाबली हैं, उनको जो पटखनी देगा वो यूपी की सियासत का अंडरटेकर होगा! योगी मैदान में जाने से पहले कांवड़ियों पर फूल बरसा रहे हैं, हिंदुत्व का मुद्दा उठा रहे हैं, शिव-कृष्ण और राम की बात करना शुरू कर चुके हैं! विधानसभा सत्र में योगी कोई नया नारा दे सकते हैं. सपा के खेमे में हड़कंप मच सकता है. केंद्र और राज्य की योजनाएं से चुनावी फायदा मिल सकता है! योगी का नारा PDA पर क्या भारी पड़ेगा? छांगुर बाबा जैसे केस क्या योगी की छवि को और बेहतर करेंगे? मुजफ्फरनगर से बलरामपुर तक ATS एक्शन, अयोध्या में NSG कमांडो से मंदिर की सुरक्षा? क्या योगी मथुरा पर कोई बड़ी तैयारी कर रहे हैं!
यूपी की विपक्षी पार्टियों का एजेंडा साफ है. दलितों-पिछड़ों को अलग किया जाए, अगड़ों के वोट पर सिर्फ बीजेपी का निशाना है! मुसलमानों के पीछे, कई पार्टियां हैं. चंद्रशेखर नए नेताजी हैं, लेकिन वोट मुसलमानों का उन्हें पूरा चाहिए, समाजवादी मुसलमानों की हितैषी है, लेकिन वफादारी पर सवाल है, फिर भी वोट पूरा चाहिए, मायावती भी मुसलमानों का वोट लेने के लिए 2012 के विधानसभा चुनाव में 100 मुसलमानों को टिकट देती हैं, इधर योगी हिन्दुत्व का परचम लहराना चाहते हैं, वो हिन्दुओं को एक कर PDA की सियासत को पस्त करना चाहते हैं, अगड़े-पिछड़े की सियासत पर बंटेंगे तो कटेंगे का जादू बिखेरना चाहते हैं?
किसके लिए कांवड़ रामबाण, किसके लिए सावन बन गया आज़ादी का सवाल?
CM योगी का हिन्दुत्व नारा, कांवड़ियों पर प्रबंधन क्या दिलाएगी फिर कुर्सी?
कौन फिसलेगा, कौन टिकेगा? सियासी रंग में कौन होगा बेरंग!