चेन्नई: पूर्व तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई के पार्टी से इस्तीफा देने के कुछ घंटों बाद, राज्य इकाई में आंतरिक अस्थिरता को और उजागर करते हुए भाजपा के दो और वरिष्ठ नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है. भाजपा तमिलनाडु के उपाध्यक्ष करु नगराजन ने घोषणा की है कि वे अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं और जल्द ही अपना इस्तीफा पत्र दिल्ली में पार्टी नेतृत्व को भेजेंगे.
उन्होंने चेन्नई एयरपोर्ट पर अन्नामलाई का स्वागत भी किया और कहा कि उन्होंने पूर्व भाजपा नेता को समर्थन देने का फैसला कर लिया है. राज्य सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. अपने इस्तीफा पत्र में उन्होंने कहा कि यह फैसला “सावधानीपूर्वक विचार” के बाद और “दुख” के साथ लिया गया है.
करु नगराजन कौन हैं?
नगराजन तमिलनाडु के मीडिया में एक परिचित चेहरा हैं और अक्सर भाजपा का प्रतिनिधित्व करते हुए स्थानीय टेलीविजन डिबेट्स में दिखाई देते रहे हैं.
उन्होंने दो प्रमुख राज्य चुनावों में हिस्सा लिया, जिसमें 2016 का विधानसभा चुनाव (मायलापुर सीट से) और 2017 का चर्चित आरके नगर उपचुनाव शामिल है. हालांकि, दोनों चुनावों में वे भारी अंतर से हार गए. 2017 के उपचुनाव में तो उन्होंने नोटा से भी कम वोट प्राप्त किए, जिसे अम्मक प्रमुख टीटीवी दिनकरन ने जीता था.
अन्नामलाई ने भाजपा छोड़ी
अन्नामलाई ने आखिरकार शुक्रवार को भाजपा छोड़ दी, जिससे उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चल रही अटकलों का अंत हुआ. सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने एक “आंदोलन” की शुरुआत की घोषणा की, जो अंततः एक राजनीतिक पार्टी में बदल जाएगा और 2031 के तमिलनाडु चुनाव लड़ेंगे.
पूर्व भाजपा तमिलनाडु अध्यक्ष ने कहा कि तमिलनाडु में “कल्ट पॉलिटिक्स” से बाहर निकलकर “आम आदमी की राजनीति” लाने की जरूरत है, जिसके लिए उन्होंने अन्नामलाई मक्कल इयक्कम (AMI) आंदोलन की घोषणा की. अन्नामलाई का इस्तीफा दिल्ली यात्रा के बाद आया, जहां उन्होंने इस सप्ताह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के साथ लंबी बैठकें कीं. अपने इस्तीफा पत्र में अन्नामलाई ने तमिलनाडु में पार्टी की राजनीतिक रणनीति को लेकर नेतृत्व से “असहमति” का हवाला दिया.
अन्नामलाई की राजनीतिक यात्रा
कर्नाटक में आईपीएस अधिकारी रह चुके अन्नामलाई ने 2019 में नौकरी छोड़कर ‘वी द लीडर्स फाउंडेशन’ नामक संगठन चलाया. उनके नए आंदोलन के ज्यादातर स्वयंसेवक संभवतः इसी संगठन से आएंगे. वे 2020 में भाजपा में शामिल हुए और एक साल के अंदर राज्य अध्यक्ष बना दिए गए. एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार के खिलाफ उनकी आक्रामक मुहिम और पदयात्रा ने दक्षिणी राज्य में भाजपा की दृश्यता काफी बढ़ा दी थी.
हालांकि, 2026 के तमिलनाडु चुनावों के लिए भाजपा का एआईएडीएमके के साथ गठबंधन करने का फैसला अन्नामलाई के साथ टकराव का कारण बना, जो अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में थे. हाल के चुनावों में भाजपा के खराब प्रदर्शन के बाद यह टकराव चरम पर पहुंचा और अन्नामलाई ने पार्टी छोड़ दी. उनके जाने से तमिलनाडु में भाजपा के पास कोई प्रमुख चेहरा नहीं बचा है, जहां ऐतिहासिक रूप से उसे चुनावी सफलता हासिल करने में काफी संघर्ष करना पड़ा है.