नई दिल्ली: दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक और बड़ा कदम सामने आया है. फ्रांस के बाद अब नीदरलैंड्स के केंद्रीय बैंक (डीएनबी) ने भी अमेरिका और कनाडा में रखे अपने सोने का बड़ा हिस्सा लंदन ट्रांसफर कर दिया है. डच सेंट्रल बैंक ने खुद जानकारी दी है कि मार्च से अगस्त 2026 के बीच उसने करीब 86 टन सोना अमेरिका और कनाडा से हटाकर बैंक ऑफ इंग्लैंड (लंदन) के पास शिफ्ट किया है. यह उसके उत्तरी अमेरिका में रखे कुल सोने का 25 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा है.
क्यों उठाया ये कदम?
डीएनबी ने इसे संकट की तैयारी और जियोपॉलिटिकल अनरेस्ट के मद्देनजर एहतियाती कदम बताया है. बैंक के गवर्नर ओलाफ स्लेइपेन ने कहा, ''हमने लंदन में सोना ट्रांसफर कर अपने गोल्ड रिजर्व की ट्रेडेबिलिटी बढ़ाई है. जरूरत पड़ने पर अमेरिका और कनाडा में रखे सोने का जल्दी इस्तेमाल करना मुश्किल होता है. लंदन में रखा सोना दुनिया का सबसे आसानी से ट्रेड होने वाला गोल्ड माना जाता है.'' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें उम्मीद है कि कभी इस सोने के इस्तेमाल की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन रेजिलिएंस (लचीलापन) और तैयारियों को मजबूत करना जरूरी है.
गोल्ड रिजर्व का नया बंटवारा
ट्रांसफर का तरीका भी दिलचस्प रहा. करीब 59 टन सोना न्यूयॉर्क में बेचकर लंदन में बराबर मात्रा खरीदी गई, जबकि 27 टन भौतिक रूप से शिफ्ट किया गया. इससे पहले फ्रांस के केंद्रीय बैंक ने जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व में रखा अपना 129 टन सोना वापस ले लिया था. यह कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है. सोने की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि कई देश अब अपने गोल्ड रिजर्व को ज्यादा सुरक्षित और आसानी से इस्तेमाल होने वाले स्थानों पर शिफ्ट करने की रणनीति अपना रहे हैं.