लखनऊ: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की मतदाता सूची में ‘विकास यादव’ नाम के 10 बार दर्ज होने के मामले में निर्वाचन आयोग ने सख्त कार्रवाई की है. समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की शिकायत पर हुई जांच के बाद कंप्यूटर ऑपरेटर और पांच बीएलओ को मतदाता सूची के काम से हटा दिया गया है. उनके खिलाफ एफआईआर और विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. दो ईआरओ और एक एईआरओ पर भी विभागीय कार्रवाई होगी.
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विकास यादव नाम के युवक को पेश करते हुए आरोप लगाया था कि एक ही विधानसभा क्षेत्र में उसके नाम पर कई जगह वोट दर्ज हैं. निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी से जांच रिपोर्ट मांगी.
जांच में विकास यादव नाम की कई प्रविष्टियां सामने आईं. इनमें एक व्यक्ति का वास्तविक नाम विकास यादव पाया गया, जबकि अन्य 10 लोगों के नाम और विवरण में त्रुटियां मिलीं. इनका विवरण सही करने के लिए फॉर्म-8 भरवाया गया है.
कर्मचारियों पर कार्रवाई
जांच में कंप्यूटर ऑपरेटर और पांच बीएलओ की लापरवाही सामने आने पर उन्हें मतदाता सूची संबंधी कार्यों से हटाने के निर्देश दिए गए. संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी कर सेवा संबंधी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-32 के तहत कार्रवाई और एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं.
तत्कालीन दो ईआरओ और एक एईआरओ की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है. तीनों अधिकारियों को नोटिस देकर आरोपपत्र जारी करने और विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. निर्वाचन विभाग अब यह पता लगाएगा कि सूची तैयार करने और सुधार के दौरान किन स्तरों पर लापरवाही हुई.
आयोग ने आजमगढ़ की अन्य विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की भी जांच कराने का निर्देश दिया है. जिला निर्वाचन अधिकारी को एक सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी. इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है.