नई दिल्ली: पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से सटे तराई क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलाव ने केंद्र और राज्य सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं. खासकर श्रावस्ती, बहराइच और बलरामपुर जैसे जिलों में मुस्लिम आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बहराइच और श्रावस्ती में 30 किलोमीटर के दायरे में धार्मिक अतिक्रमण, विदेशी फंडिंग और जनसंख्या संरचना में परिवर्तन की खबरें सामने आई हैं.
बलरामपुर में पहले से ही छांगुर बाबा के धर्म परिवर्तन रैकेट, आईएसआई की कथित संलिप्तता, जाली नोटों की तस्करी और आतंकी फंडिंग जैसी गतिविधियों की बातें उजागर हो चुकी हैं. इसके अलावा, इस क्षेत्र में ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों में भी वृद्धि देखी गई है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि सीमावर्ती इलाकों में 'नो मेंस लैंड' को भरकर रास्ते बनाए गए हैं और वहां अवैध रूप से मदरसे स्थापित किए गए हैं.
इन मदरसों के जरिए घुसपैठ, अवैध मनी एक्सचेंज और आतंकी फंडिंग की आशंकाएं जताई जा रही हैं. मजहबी शिक्षा के नाम पर नेपाल सीमा पर जनसंख्या बढ़ाने की रणनीति की भी बात सामने आई है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन मुद्दों को गंभीरता से लिया है और सीमावर्ती जिलों के डीएम और एसपी को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी स्थिति चिंताजनक है. 2021 की जनगणना के अनुसार, नेपाल में हिंदू आबादी में 0.11% की कमी आई है, जबकि मुस्लिम और ईसाई आबादी में वृद्धि हुई है.
नेपाल में मुस्लिम जनसंख्या अब 5.09% हो गई है, जो 2011 में 4.39% थी. इनमें से अधिकांश लोग तराई क्षेत्र में रहते हैं, जो भारत की सीमा से सटा है और मूल रूप से नेपाली नहीं हैं. केंद्रीय गृह मंत्री की बैठक में देवीपाटन मंडल के आईजी अमित पाठक और श्रावस्ती के डीएम शामिल हुए.
उनकी रिपोर्ट के आधार पर सीमावर्ती क्षेत्रों में कार्रवाई की रणनीति बनाई जा रही है. देवीपाटन मंडल के कमिश्नर शशि भूषण लाल सुशील ने कहा, "हम सीमा सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और नेपाल सरकार से भी सहयोग लिया जा रहा है." इससे स्पष्ट है कि भारत सरकार सीमा सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलाव के मुद्दे पर गंभीरता से काम कर रही है.