नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बीच सदन से बाहर सियासी सरगर्मी जोरों पर है. मंगलवार शाम को कुशीनगर के भाजपा विधायक पंचानंद पाठक के लखनऊ स्थित निवास पर ब्राह्मण विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें पूर्वांचल और बुंदेलखंड के लगभग 52 विधायक शामिल हुए.
खास बात यह कि बैठक में सिर्फ भाजपा के ही नहीं, बल्कि अन्य दलों के ब्राह्मण विधायक भी पहुंचे. मिर्जापुर के विधायक रत्नाकर मिश्रा और एमएलसी उमेश द्विवेदी की इस आयोजन में प्रमुख भूमिका रही. इसके अलावा देवरिया के विधायक और मुख्यमंत्री के पूर्व मीडिया सलाहकार डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी समेत बांदा, बदलापुर, खलीलाबाद, नौतनवा, तरबगंज और मेहनौन जैसे क्षेत्रों के विधायक भी मौजूद रहे. बैठक को औपचारिक रूप से “सहभोज” का नाम दिया गया.
सूत्रों के अनुसार, चर्चा का मुख्य मुद्दा ब्राह्मण समाज की वर्तमान स्थिति रहा. विधायकों ने खुलकर कहा कि जातीय राजनीति में कई समुदाय मजबूत स्थिति में आ गए हैं, लेकिन ब्राह्मण खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. उनका दावा है कि पार्टी संगठन और सरकार में उनकी आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा.
वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 52 ब्राह्मण विधायक हैं, जिनमें से 46 भाजपा के हैं. इससे पहले मानसून सत्र में ठाकुर विधायकों ने भी इसी तरह की बैठक की थी. हाल के दिनों में भाजपा नेता सुनील भराला का प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने की कोशिश और फिर उसे वापस लेना भी इसी असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है.
इटावा में कथावाचक मामले के बाद ब्राह्मण समाज में व्याप्त नाराजगी और बढ़ गई है. सोशल मीडिया पर भी सरकार और कुछ विधायकों के प्रति खुली नाराजगी देखी जा रही है. इस बैठक को ब्राह्मण विधायकों के नए संगठित प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.