Congress MLA Rajendra Bharti: दतिया के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 25 साल पुराने फिक्स्ड डिपॉजिट धोखाधड़ी मामले में कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है. कोर्ट ने उन्हें जमानत भी दे दी है, लेकिन उनकी विधायकी अब खतरे में पड़ गई है.
कोर्ट ने उन्हें आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से जुड़ी विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया है. इसमें धारा 120B, 420, 467, 468 और 471 शामिल हैं. कोर्ट ने अलग-अलग धाराओं में तीन-तीन साल और दो साल की सजा दी है.
इस फैसले के बाद राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता पर संकट मंडराने लगा है. हालांकि, उन्हें अपील दायर करने के लिए 60 दिन का समय मिला है. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हाईकोर्ट से सजा पर रोक (स्टे) मिल जाती है, तो उनकी सदस्यता बच सकती है. यह पूरा विवाद भूमि विकास बैंक से जुड़ा है. राजेंद्र भारती ने अपने अध्यक्ष रहते अपनी मां सावित्री श्याम के नाम पर बैंक में 10.50 लाख रुपये की एफडी तीन साल के लिए कराई थी, जिस पर 13.50 प्रतिशत ब्याज तय था.
आरोप है कि बाद में इस एफडी की समय अवधि को गलत तरीके से तीन साल से बढ़ाकर 15 साल कर दिया गया. इस अनियमितता का खुलासा बैंक के एक कर्मचारी नरेंद्र सिंह ने किया, जिन्होंने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई. कोर्ट ने जांच के दौरान दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर पाया कि एफडी की अवधि में बदलाव बैंक के नियमों के विरुद्ध था.
इसी वजह से विधायक को दोषी माना गया. सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी ठहराया गया है. कुछ समय पहले राजेंद्र भारती ने स्वयं इस मामले को ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट से दिल्ली ट्रांसफर करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर कर लिया था.
बता दें कि राजेंद्र भारती ने 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में दतिया सीट से पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को हराकर कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी. अब फैसले के बाद उनकी राजनीतिक भविष्य पर असर पड़ सकता है, हालांकि अंतिम फैसला अपील पर निर्भर करेगा.