...ये जो व्यक्ति सड़क पर पड़े हैं, जिन्हें ये लोग घेरकर डंडे से मार रहे हैं, ये कोई मामूली आदमी नहीं हैं, इनके भतीजे बीजेपी के विधायक हैं, और जो लोग मार रहे हैं, वो कोई गुंडे बदमाश नहीं, बल्कि आगरा नगर निगम के फूड सेनेटरी इंस्पेक्टर के साथ पहुंचे कर्मचारी हैं. इन लोगों पर मारपीट का ऐसा भूत सवार था कि इनकी पत्नी बचाने आई तो उसे भी नहीं छोड़ा, जो सामने आया सब पर डंडा चलाया.
ऐसा आरोप जगदीश कुशवाहा ने लगाया है, वो कहते हैं कि जगनेर रोड पर नत्थी मिष्ठान भंडार के नाम से मेरी दुकान है. दोपहर करीब 1 बजे नगर निगम के सेनेटरी फूड इंस्पेक्टर प्रदीप गौतम दुकान में आए. प्लास्टिक के 4 गिलास और पॉलिथीन दिखने पर चालान काटने लगे. उन्होंने कहा 5 हजार का चालान होगा, कुछ कम करने की बात कही तो 3 हजार रुपये लिए और 1 हजार का रसीद दिया. विरोध करने पर सील करने की धमकी दी और चले गए.
लेकिन थोड़ी ही देर बाद वो बुलडोजर के साथ दुकान पर पहुंचते हैं, साथ में 15-20 कर्मचारी भी थे, जिनके हाथों में डंडे थे, और उसके बाद वो क्या करते हैं, जरा पूरा वीडियो आप भी देखिए, फिर बताते हैं बीजेपी विधायक भगवान सिंह कुशवाहा ने इस पूरे मामले पर क्या कहा है. उन्होंने कहा, ''डंडे से मारा, छाती पर पैर रखा, भागने पर भी नहीं छोड़ा.''
आरोप ये भी है कि उनकी दुकान के बाहर के हिस्से पर बुलडोजर चला दिया जाता है, यहां तक कि विधायक का नाम लेने पर सेनेटरी इंस्पेक्टर साहब भड़क भी जाते हैं. नतीजा दोनों पक्ष के लोग थाने पहुंच जाते हैं, वहां हंगामा बढ़ता देख पुलिस दोनों पक्ष के 3-3 लोगों का मेडिकल करवाती है. सेनेटरी इंस्पेक्टर का दावा है कि दुकानों पर कार्रवाई की जा रही थी, नत्थी मिष्ठान भंडार के मालिक कार्रवाई का विरोध करने लगे, शमन शुल्क देने से मना किया, और लोहे के सरिया से हमला बोल दिया. सफाई मित्र भोला और मधुसूदन के सिर और कंधे पर चोट लगी है. इन लोगों ने पथराव भी किया. उसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई.
पुलिस मुकदमा दर्ज कर जांच में जुटी है,नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने इस मामले की जांच के लिए नगर आयुक्त शिशिर कुमार को जांच अधिकारी बनाया है, लेकिन उनकी रिपोर्ट से ज्यादा चर्चा अब विधायकजी की हो रही है, जिनके चाचा के साथ बीच सड़क ऐसी हरकत हुई. विधायक भगवान सिंह कुशवाहा का कहना है कि रिश्तेदार की दुकान पर निगमकर्मी गए थे. गलत तरीके से चालान की कार्रवाई की. अभद्रता की गई. इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष लेकर जाऊंगा. आगरा आकर नगरायुक्त और जिलाधिकारी से वार्ता करूंगा, कार्रवाई बिना मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में की गई.
अब मामला सीधे सीएम योगी तक पहुंचेगा तो कार्रवाई कितनी बड़ी और कड़ी होगी इसका अंदाजा आप भी लगा सकते हैं. लेकिन यहां सवाल ये भी है कि जब दुकानों में प्लास्टिक बैन है और उसे हटाने को लेकर चालान काटे जा रहे हैं तो इनके दुकान में प्लास्टिक क्यों थी, और अगर प्लास्टिक थी भी तो क्या किसी अधिकारी को ऐसी हरकत करने की इजाजत मिल सकती है, वो बीच सड़क इस तरीके की हरकत किसी के साथ कैसे कर सकता है, क्या ये मामला कानूनी कार्रवाई से ज्यादा ईगो का था. या फिर यूपी के दूसरे जिलों में भी इस तरीके के अधिकारी हैं, जो जनता की नहीं सुन रहे, कानून पालन करवाने के नाम पर उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं. अगर हां तो फिर इसकी सीधी शिकायत करें और ऐसे लोगों पर क्या एक्शन होना चाहिए, अपनी राय भी दें.