उत्तर प्रदेश उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के द्वारा संगठन को सरकार से बड़ा बताने वाले पोस्ट के बाद यूपी सरकार पर कटाक्ष करते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को मानसून ऑफर की घोषणा की है, जिसमें उन्होंने असंतुष्टों से 100 विधायक लाने और उत्तर प्रदेश (UP) में सरकार बनाने के लिए कहा है. अखिलेश यादव ने शोसल मीडिया प्लेट फॉर्म एक्स पर पोस्ट कर ऑफर की घोषणा करते हुए लिखा है कि मानसून ऑफर: सौ लाओ, सरकार बनाओ!
इससे पहले एक निजी न्यूज चैनल से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि मौर्य का मुख्यमंत्री बनने का सपना है और अगर वह अपने साथ 100 विधायक ला सकते हैं, तो समाजवादी पार्टी उन्हें सरकार बनाने के लिए पूरा समर्थन देगी.
गौरतलब हो कि बुधवार को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अपने कार्यालय से X पर एक पोस्ट करके हलचल मचा दी थी, जिसमें मौर्य ने कहा था कि संगठन सरकार से बड़ा है, कार्यकर्ताओं का दर्द मेरा दर्द है. संगठन से बड़ा कोई नहीं है और कार्यकर्ता ही मेरा गौरव हैं. इस पोस्ट ने विपक्ष को यह अनुमान लगाने पर मजबूर कर दिया कि यह भाजपा में असंतोष का संकेत है.
इसी बात पर अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता के लिए भाजपा की लड़ाई का मतलब है कि वह जनता के बारे में नहीं सोच रही है. सपा अध्यक्ष ने कहा है कि भाजपा की सत्ता की लड़ाई की गर्मी में उत्तर प्रदेश में शासन और प्रशासन दोनों ठंडे बस्ते में चला गया है. तोड़फोड़ की राजनीति का जो काम भाजपा दूसरे दलों में करती थी, वह अब अपनी पार्टी के अंदर कर रही है. यही कारण है कि भाजपा अंदरूनी कलह के दलदल में धंसती जा रही है. अखिलेश ने कहा है कि भाजपा में कोई भी जनता के बारे में नहीं सोचता.
केशव मौर्य ने सपा पर भी किया था कटाक्ष
इसस पहले बुधवार को केशव प्रसाद मौर्य समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि भाजपा राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर मजबूत है और 2017 की तरह 2027 के विधानसभा चुनावों में भी विजयी होने जा रही है. उन्होंने कहा था कि सपा बहादुर श्री अखिलेश यादव जी, भाजपा के पास राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर एक मजबूत संगठन और सरकार है व सपा का पीडीए एक धोखा है.
उन्होंने अखिलेश सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि यूपी में सपा की गुंडागर्दी की वापसी असंभव है, भाजपा 2027 के विधानसभा चुनावों में 2017 को दोहराएगी. उन्होंने आंकड़े गिनाते हुए कहा था कि 403 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास 283 सीटें हैं, जबकि सपा के नेतृत्व वाले भारतीय ब्लॉक के पास सिर्फ 107 सीटें हैं.