मणिकर्णिका घाट को लेकर अखिलेश ने फिर दिया बयान, कहा- 'जपा ने जितनेदिर तोड़े, उतने किसी ने नहीं'

Amanat Ansari 17 Jan 2026 09:13: PM 2 Mins
मणिकर्णिका घाट को लेकर अखिलेश ने फिर दिया बयान, कहा- 'जपा ने जितनेदिर तोड़े, उतने किसी ने नहीं'

नई दिल्ली: वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्य को लेकर इन दिनों उत्तर प्रदेश की राजनीति में तीखी बहस छिड़ी हुई है. यह घाट हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां अंतिम संस्कार होते हैं और सदियों पुरानी धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत मौजूद है. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने इतने मंदिर तोड़े हैं, जितने किसी राजा ने भी नहीं तोड़े होंगे.

उनका दावा है कि विकास के नाम पर प्राचीन संरचनाओं और मंदिरों को नष्ट किया जा रहा है, ताकि ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया जा सके और मुनाफा कमाया जा सके. अखिलेश ने यह भी कहा कि बीजेपी को काशी की विरासत या वहां के लोगों की कोई चिंता नहीं है, बल्कि उनका मकसद सिर्फ आर्थिक लाभ है. उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि काशी ही अंततः भाजपा के लिए विनाश का कारण बनेगी.

सीएम योगी ने दी थी प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (17 जनवरी 2026) को अचानक वाराणसी का दौरा किया. उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया और इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि काशी को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है. योगी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग एआई जनरेटेड वीडियो बनाकर जनभावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, खासकर रानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति के टूटने के दावों को लेकर. उन्होंने स्पष्ट किया कि मूर्तियां और अन्य धार्मिक प्रतीक पूरी तरह सुरक्षित हैं, उन्हें संरक्षित किया गया है और पुनर्निर्माण के बाद पहले की तरह ही स्थापित किया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्य इसलिए हो रहा है ताकि मानसून में अंतिम संस्कार आसान हो सकें और पूरे इलाके में स्वच्छता व सम्मानजनक व्यवस्था बनी रहे. उन्होंने विकास के लाभों का जिक्र करते हुए कहा कि काशी विश्वनाथ धाम के बाद से देश की जीडीपी में 1.3 लाख करोड़ का योगदान जुड़ा है और पहले जहां गंगाजल से स्नान तक मुश्किल था, अब वहां आचमन भी सहज हो गया है.

यह विवाद तब तेज हुआ जब घाट पर जेसीबी से तोड़फोड़ की तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए, जिसमें दावा किया गया कि 300 साल पुरानी संरचनाएं और अहिल्याबाई होल्कर से जुड़ी मूर्तियां क्षतिग्रस्त हुईं. विपक्ष (सपा-कांग्रेस) इसे विरासत के साथ छेड़छाड़ बता रहा है, जबकि सरकार इसे पुरानी खराब संरचनाओं को हटाकर बेहतर सुविधाएं देने का काम बता रही है. फिलहाल काम कुछ समय के लिए रुका हुआ है और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं.

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