नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने रेप, शोषण और पीड़िता की तस्वीरें ऑनलाइन साझा करने के 26 वर्षीय आरोपी को इस शर्त पर जमानत दी कि वह जेल से बाहर आने के 3 महीने के भीतर 23 वर्षीय पीड़िता से शादी करेगा और सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा. 20 फरवरी को सुनाए गए फैसले में न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने कहा, "किसी व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार, जो संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा गारंटीकृत है, को केवल इसलिए नहीं छीना जा सकता क्योंकि उस व्यक्ति पर अपराध करने का आरोप है जब तक कि उचित संदेह से परे अपराध स्थापित न हो जाए."
मामले के विवरण के अनुसार, राजस्थान के सीकर जिले का रहने वाला 26 वर्षीय व्यक्ति पिछले साल एक केंद्र में कोचिंग क्लास में जाता था, जहां पीड़िता भी जाती थी. वह पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा था. मई 2024 में दर्ज पुलिस शिकायत में, महिला के परिवार ने कहा कि उनकी बेटी का उस साल फरवरी से बार-बार यौन उत्पीड़न किया गया था. इसके बाद आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (रेप), 506 (आपराधिक धमकी) और आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई. आरोपी को 21 सितंबर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.
3 अक्टूबर, 2024 को आगरा सत्र न्यायालय के न्यायाधीश विवेक संगल ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट में कार्यवाही के दौरान अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि आवेदक ने यूपी पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने के बहाने महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे. उसने उसके साथ रेप भी किया और उनके "अंतरंग वीडियो" को सार्वजनिक करने की धमकी देकर "उससे 9 लाख रुए की उगाही" की. उच्च न्यायालय के फैसला सुनाए जाने के बाद इस आदेश की देशभर में चर्चा हो रही है.