नई दिल्ली: इन ख़बरों की हेडलाइन जरा गौर से देखिए, लिखा है- शनिवार को ईरान ने दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग की है, बकायदा इसका एक ऑडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें पायलट चिल्ला रहा, पहले आपने अनुमति दी, आपकी लिस्ट में दूसरे नंबर पर हमारा नाम है, फिर ऐसा क्यों कर रहे हैं...मुझे मुड़ने दो...
उधर ये घटना होती है, इधर दिल्ली में ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फथली तलब कर लिए जाते हैं, भारत कड़ा विरोध दर्ज कराता है, और उसके बाद मीडिया में जो ख़बरें आती हैं, वो हैरान करने वाली थीं, पता चलता है ईरान की सेना पर अब वहां की सरकार का कंट्रोल नहीं है, वहां के विदेश मंत्री अराघची जहां कूटनीतिक रास्ते के सहारे चीन, भारत और रूस समेत कई देशों से दोस्ताना रवैया बरकरार रखना चाहते हैं, तो वहीं ईरान की सेना हर हाल में होर्मुज को अपने कब्जे में रखना चाहती है.
क्योंकि अमेरिकी नाकेबंदी के बाद वो किसी को भी होर्मुज से एक बूंद तेल नहीं ले जाने देना चाहती, ईरान की सेना की हालत देखकर ऐसा लगता है मानो वो पाकिस्तान की असीम मुनीर की सेना की तरह नियंत्रण से बाहर हो चुकी है, जैसे पाकिस्तान में सरकार से ज्यादा सेना की चलती है, कुछ ऐसे ही हालात फिलहाल ईरान में दिख रहे हैं. नतीजा ईरान की भाषा बदलने लगी है.
पहले उसने चीन और भारत को वहां से जहाज ले जाने की अनुमति दी थी, लेकिन फिर उसने चीन के जहाज ये कहकर लौटा दिए कि एक ही अनुमति पर हर बार जहाज नहीं जाएगा, बल्कि हर बार अलग-अलग अनुमति लेनी होगी, जिसके बाद चीन और ईरान के बीच भी तनातनी की ख़बरे सुनने को मिली, और अब भारत भी अपने जहाज को निशाना बनाए जाने से बेहद नाराज है.
फिलहाल उस जहाज और उस पर सवार क्रू को लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन भारत सरकार की ओर से विदेश में सेना भेजने की ख़बर जरूर सामने आई है...जिसने अमेरिका और चीन दोनों की बेचैनी बढ़ा दी है..न्यूज 18 की रिपोर्ट दावा है कि भारत और रूस के बीच ये करार हुआ है कि तीन हजार जवानों के अलावा 10 मिलिट्री एयरक्राफ्ट और 5 युद्धपोत भी दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्र में तैनात कर सकेंगे.
ये फैसला दोनों देशों की दोस्ती और मुश्किल वक्त में नई मिसाल लिखने की ओर इशारा करता है, इसका होर्मुज से कोई लेना-देना नहीं है...होर्मुज पर जो हो रहा है, उस पर पूरी दुनिया नजरें गड़ाए बैठी है, एक तरफ ट्रंप जल्द ही युद्ध खत्म होने की बात कर रहे हैं, इस्लामाबाद में दूसरे दौर की मीटिंग होने की ख़बरें हैं, तो दूसरी तरफ तेल और गैस का संकट बढ़ने का खतरा भी मंडराने लगा है...ईरानी राष्ट्रपति पजेश्कियन ने कहा है कि ईरान मौजूदा संघर्ष को सम्मान के साथ खत्म करना चाहता है और किसी भी देश को उसके वैध परमाणु अधिकारों से वंचित करने का अधिकार नहीं है.
जबकि अमेरिका ईरान की ये मांग मानने को तैयार नहीं है, और पूरी बातचीत इसी पर फेल हो जा रही है...लेकिन क्या ईरान की सेना इस हालत को और ज्यादा दिन झेल पाएगी, क्योंकि अब तक होर्मुज में जहाजों की आवाजाही कर वो तेल बेचकर पैसे कमा रहा था, अब अमेरिकी नाकेबंदी के बाद न तो वो जहाज भेज पा रहा, और ना ही किसी का जहाज गुजर पा रहा... हालत ये है कि ईरान की नाकेबंदी के बाद कई जहाजों ने रास्ता बदल लिया है और समुद्री ट्रैफिक लगभग खाली हो गया है. जिससे दुनियाभर में तेल और गैस के संकट बढ़ने की आशंका जताई जा रही है...