US-Iran War: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच पोप फ्रांसिस ने एक सशक्त और स्पष्ट संदेश दिया है. उन्होंने बिना किसी का नाम लिए हुए अमेरिका और इजरायल के शीर्ष नेताओं को सीधे-सीधे शांति और अहिंसा की याद दिलाई. पोप ने कहा कि जिन नेताओं के हाथ खून से सने होते हैं और जो युद्ध की आग भड़काते हैं, भगवान उनकी प्रार्थनाएं स्वीकार नहीं करते.
पोप ने यीशु मसीह को ‘शांति का राजा’ बताते हुए कहा कि मसीह ने कभी हिंसा का रास्ता नहीं चुना. उन्होंने दुख, अपमान और क्रूस की मौत तक का सामना किया, लेकिन बदले में हथियार नहीं उठाया. उन्होंने विनम्रता, प्रेम और त्याग को चुना. उन्होंने जोर देकर कहा कि यीशु का पूरा जीवन और संदेश युद्ध, आक्रामकता और हिंसा के एकदम विपरीत है.
क्रूस पर चलते हुए भी यीशु ने शत्रु से बदला लेने की बजाय प्रेम और क्षमा का मार्ग दिखाया. पोप ने बाइबिल के एक महत्वपूर्ण वचन का हवाला देते हुए चेतावनी दी, ''चाहे तुम कितनी ही प्रार्थनाएं कर लो, मैं नहीं सुनूंगा, क्योंकि तुम्हारे हाथ खून से सने हुए हैं.''
उन्होंने साफ कहा कि धर्म का नाम लेकर या धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल करके किसी भी तरह के संघर्ष या युद्ध को जायज नहीं ठहराया जा सकता. पोप ने याद दिलाया कि यीशु मसीह इस दुनिया में दीवारें तोड़ने और इंसानों को एक-दूसरे के करीब लाने के लिए आए थे.
उन्होंने गधे पर सवार होकर यरूशलेम में प्रवेश किया था, जो घोड़े पर सवार होकर आने वाले राजाओं के विपरीत, विनम्रता और अहिंसा का जीवंत प्रतीक था. बता दें कि अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हो रही है.