ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच पुतिन का बड़ा कदम: इस देश के पास तैनात किए युद्धपोत और पनडुब्बी

Amanat Ansari 01 Apr 2026 12:52: PM 2 Mins
ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच पुतिन का बड़ा कदम: इस देश के पास तैनात किए युद्धपोत और पनडुब्बी

जकार्ता: रूसी नौसेना के पैसिफिक फ्लीट का एक दस्ता इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के तंजुंग प्रियोक बंदरगाह पर पहुंच गया है. यह दस्ता इंडोनेशियाई नौसेना के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करने के लिए पहुंचा है. वेशेषज्ञ दावा कर रहे हैं कि रूस ने कई पनडुब्बियां अमेरिका के मुकाबले के लिए होर्मुज में भी तैनात कर रखा है, ताकि यूएस नेवी ईरान पर ज्यादा दबाव न डाल सके.

इस दस्ते में शामिल जहाजों में ग्रोम्की-335 कार्वेट, पेट्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की (B-274) पनडुब्बी और आंद्रेई स्टेपानोव टगबोट शामिल हैं. रूस के इन जहाजों का हिंद महासागर क्षेत्र में आना काफी ध्यान खींच रहा है. खासकर इसलिए क्योंकि इस समय अमेरिका ईरान से जुड़े युद्ध में व्यस्त बताया जा रहा है. रूस इस मौके पर क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति और क्षमता दिखाने की कोशिश कर रहा है.

रूस का मकसद क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि इस यात्रा को आधिकारिक रूप से सिर्फ संयुक्त युद्धाभ्यास और नौसैनिक सहयोग के रूप में बताया जा रहा है, लेकिन इसका महत्व इससे कहीं ज्यादा है. रूस इस दौरे के जरिए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी समुद्री ताकत का प्रदर्शन कर रहा है. तंजुंग प्रियोक बंदरगाह पर कार्वेट, पनडुब्बी और सहायता पोत की मौजूदगी से रूस यह साफ संदेश दे रहा है कि दक्षिण-पूर्व एशिया तक अपनी नौसैनिक पहुंच और तैनाती की क्षमता वह अभी भी बनाए रखे हुए है.

इस दस्ते की खासियत

  • कार्वेट ग्रोम्की-335: सतही युद्धक क्षमता
  • पनडुब्बी पेट्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की: पानी के नीचे निगरानी और हमले की क्षमता
  • टगबोट आंद्रेई स्टेपानोव: लंबी यात्रा के दौरान सहायता और लॉजिस्टिक सपोर्ट

पनडुब्बी का शामिल होना खासतौर पर महत्वपूर्ण है. सिर्फ सतही जहाज भेजने से यह दौरा सामान्य लगता, लेकिन पनडुब्बी के साथ आने से रूस अपनी परिचालन क्षमता, दूर क्षेत्रों में टिके रहने की ताकत और घर से दूर भी प्रभावी उपस्थिति बनाए रखने का संकेत दे रहा है. यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर कई तनावपूर्ण स्थितियां चल रही हैं. रूस इससे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को यह याद दिला रहा है कि यूक्रेन या मध्य पूर्व में व्यस्त होने के बावजूद, वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी नौसैनिक क्षमता को नजरअंदाज नहीं होने देना चाहता.

इंडोनेशिया के लिए भी यह यात्रा रणनीतिक रूप से अहम है. पनडुब्बी जैसी उन्नत संपत्ति की मौजूदगी क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन के लिहाज से मायने रखती है. कुल मिलाकर, यह दौरा रूस की इंडो-पैसिफिक रणनीति का हिस्सा लगता है, जिसमें वह अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत दिखाने और क्षेत्रीय देशों के साथ संबंध बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

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