मार्च में मानसून वाला सीजन कैसे आया, बेमोसम बारिश की असल वजह ये है, अनाज महंगा होने की चर्चा क्यों ?

Abhishek Chaturvedi 31 Mar 2026 09:52: PM 2 Mins
मार्च में मानसून वाला सीजन कैसे आया,  बेमोसम बारिश की असल वजह ये है, अनाज महंगा होने की चर्चा क्यों ?

मार्च वाला मॉनसून आया, दोबारा निकली जैकेट, रो पड़े किसान, बेमौसम बारिश का पूरा सच सुनिए
मुंबई, शंघाई, ढाका, बैंकॉक, जकार्ता, न्यूयॉर्क और लंदन पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, WMO का बड़ा अलर्ट
क्या है जेट स्ट्रीम, जिसने मौसम वैज्ञानिकों को उलझाया, क्या युद्ध के बीच बढ़ेंगे अनाज के दाम ?

ये मार्च के महीने में क्या हो रहा है, घरों में पैक किया कंबल और जैकेट वापस निकलने लगा है, गर्मी की बजाय लोग ठंड महसूस कर रहे हैं...खेतों में लगी गेहूं और कई रबी फसलें तबाह हो चुकी हैं..किसान परेशान हैं, युद्ध की वजह से पहले से कई चीजों के दाम बढ़ने की आशंका है, ऊपर से बारिश ने किसानों की चिंताएं और बढ़ा दी है...तो सवाल ये हो क्यों हो रहा है, और ऐसा कब तक चलेगा, क्या मौसम का चक्र बिगड़ चुका है...इसे समझने के लिए ये जानना होगा कि जलवायु परिवर्तन की वजह से जो सर्दी-गर्मी औऱ बारिश कभी भी हो रही है, वो तबाही का इशारा है... WMO यानि विश्व मौसम संगठन ने ये चिंता जताई है कि

साल 2027 तक वैश्विक तापमान और ऊपर जाने की संभावना है, जिससे ग्लेशियर और तेजी से पिघलेंगे, समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा, आने वाले कुछ सालों में तटीय इलाकों में बसे शहर मुंबई, शंघाई, ढाका, बैंकॉक, जकार्ता, न्यूयॉर्क और लंदन के डूबने की आशंका है. 

अब यहां सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि इसे रोकने के लिए कुछ क्यों नहीं किया जा रहा है...आखिर वो जेट स्ट्रीम क्या है, जिसकी वजह से बारिश अचानक से होने लगी है...मौसम वैज्ञानिक जिस पश्चिमी विक्षोभ का नाम ले रहे हैं, उसका रुख अचानक से कैसे बदल गया है, आखिर ये हवा उल्टी क्यों बहने लगी है...

ऊपरी वायुंमंडल जिसे अंग्रेजी में ट्रोपोस्फियर कहते हैं, वहां पश्चिम से पूर्व की ओर चलने वाली हवाओं की पट्टी जेट स्ट्रीम कही जाती है.
धरती के सबसे उत्तरी क्षेत्र आर्कटिक ध्रुव पर हर 10 साल में 13 फीसदी बर्फ पिघली रही है, जिससे जेट स्ट्रीम में अस्थिरता बढ़ रही है
जिसकी वजह से अलग-अलग जगहों पर सर्दी-गर्मी के पैटर्न और भारी बारिश, सूखा या गर्म लहर की स्थिति पैदा हो रही है.

जिसे लेकर वैज्ञानिक लगातार सवाल उठा रहे हैं, वो रिसर्च के बाद लोगों को ग्रीन एनर्जी पर फोकस होने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण के अनुकूल विकास करने की अपील कर रहे हैं...भारत इस दिशा में बड़ा काम कर भी रहा है, क्योंकि दुनिया के कई विकसित देश आज कार्बन उत्सर्जन इतनी मात्रा में कर रहे हैं कि पूरी दुनिया का वायुमंडल प्रभावित हो रहा है, यही वजह है कि अब जब मौसम पर भी इसका असर पड़ने लगा है, बैमौसम सर्दी, गर्मी और बारिश होने लगी है तो सरकारें भी इसे लेकर नीति बनाने पर ध्यान देने लगी है, पर एक दिन में कुछ भी नहीं होने वाला...अगर आप भविष्यवाणियों पर गौर करें तो कई 100 साल पहले भविष्य मल्लिका में ऐसी कई भविष्याणियां लिख दी गई थीं...इसमें ये जिक्र मिलता है कि

समुद्र का जलस्तर इतना बढ़ेगा कि जगन्नाथ मंदिर की 22वीं सीढ़ी तक पानी पहुंच जाएगा, भक्त विग्रह को छातियाबटा स्थान पर ले जाएंगे.
पृथ्वी पर 7 दिन तक अंधकार रहेगा. यानि प्राकृतिक आपदाओं के कारण धरती पर सात दिनों तक सूर्य नहीं निकलेगा.

यही वजह है कि भविष्यवाणियों को मानने वाले इसे कलियुग का प्रबाव बता रहे हैं, कलियुग के आखिरी चरण में कई ऐसी बातों की भविष्यवाणियां बड़े-बड़े संतों ने की है तो वहीं मौसम विज्ञान को मानने वाले इसे प्रकृति का असुंतलन बता रहे हैं, जो इंसान की गलतियों की वजह से बिगड़ा है...अब मान्यता चाहे किसी की कुछ भी हो, सच्चाई यही है कि मौसम का संतुलन बिगड़ा है, लोग इस बात से आशंकित हैं कि आने वाले दिनों में क्या होगा...

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