Trending News: अमेरिका 32 साल पहले कजाकिस्तान से 20 एटम बम बनाने जितना यूरेनियम बिना किसी लड़ाई के निकाल लाया था, लेकिन ईरान से इतना आसान नहीं है. अभी अमेरिका ईरान के पास मौजूद उस एनरिच्ड यूरेनियम को बाहर निकालने की योजना बना रहा है, जिससे 10 से 11 परमाणु बम बन सकते हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन इस बेहद जटिल और खतरनाक ऑपरेशन पर गंभीरता से विचार कर रहा है.
इस प्लान में अमेरिकी विशेष बलों को ईरान के अंदर भेजकर लगभग 450 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम को जबरन निकालने की बात है. अगर यह ऑपरेशन होता है तो यह आधुनिक समय का सबसे मुश्किल और जोखिम भरा मिशन साबित हो सकता है. इसमें कई दिन लग सकते हैं और अमेरिकी सैनिकों को ईरानी जमीन पर लंबे समय तक रहना पड़ सकता है. ट्रंप ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन वे इस आइडिया के प्रति पूरी तरह खुले हैं.
1994 का कजाकिस्तान ऑपरेशन
सोवियत संघ के टूटने के बाद कजाकिस्तान में एक पुरानी फैक्ट्री की वेयरहाउस में 600 किलोग्राम हाईली एनरिच्ड यूरेनियम (HEU) पड़ा हुआ था. यह मात्रा 20 परमाणु बम बनाने के लिए काफी थी. उस समय कजाकिस्तान की सुरक्षा बेहद कमजोर थी और यह सामग्री आतंकवादियों या तस्करों के हाथ लगने का खतरा था.
अमेरिका ने महीनों की गुप्त डिप्लोमेसी के बाद कजाकिस्तान सरकार से सहमति ली. राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने अक्टूबर 1994 में इस गुप्त मिशन को मंजूरी दी. कोडनेम रखा गया प्रोजेक्ट सफायर. तीन विशाल C-5 Galaxy विमानों में 31 सदस्यों की टीम (ज्यादातर सिविलियन टेक्निशियन और विशेषज्ञ) कजाकिस्तान के उस्त-कामेनोगोर्स्क पहुंची.
टीम ने करीब एक महीने तक दिन में 12 घंटे काम किया. सुबह अंधेरा रहते प्लांट पहुंचती और शाम को अंधेरा होने के बाद लौटती. 600 किलो HEU को 400 से ज्यादा खास कंटेनरों में पैक किया गया. बर्फ, ठंड और रेडिएशन के खतरे के बीच ट्रकों से सामग्री एयरपोर्ट पहुंचाई गई. विमान सीधे अमेरिका पहुंचे और बाद में इस यूरेनियम को कम एनरिच्ड रूप में बदल दिया गया.
पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण और गुप्त रही. कजाकिस्तान सरकार ने पूरा सहयोग दिया. कोई लड़ाई नहीं हुई और कोई सैनिक घायल नहीं हुआ. क्लिंटन ने नवंबर 1994 में इस सफलता की सार्वजनिक घोषणा की.
ईरान के मामले में सबसे बड़ी समस्या
कजाकिस्तान में अमेरिका को स्थानीय सरकार का पूरा सहयोग मिला था. दोनों देशों के बीच भरोसा और डिप्लोमेसी काम कर रही थी. लेकिन ईरान बिल्कुल अलग स्थिति है. ईरान कभी भी अपना यूरेनियम अमेरिका को सौंपने को तैयार नहीं है. खासकर हाल के युद्ध के बाद ईरान और भी आक्रामक मूड में है. अगर अमेरिका वहां ग्राउंड ऑपरेशन करता है तो ईरान इसे सीधा हमला मानकर भारी जवाब देगा, मिसाइल हमले, ड्रोन हमले और जमीन पर लड़ाई हो सकती है.
कजाकिस्तान वाला मिशन दोस्ताना देश से सामान निकालने जैसा था. ईरान वाला ऑपरेशन लगभग एक युद्ध क्षेत्र में छापेमारी जैसा होगा, जहां ईरानी बल यूरेनियम बचाने के लिए हर हद तक जा सकते हैं. अभी तक ट्रंप प्रशासन इस प्लान पर अंतिम फैसला नहीं ले चुका है, लेकिन चर्चा काफी गंभीर स्तर पर चल रही है. ईरान के यूरेनियम को निकालना कजाकिस्तान वाले मिशन से कहीं ज्यादा मुश्किल और खतरनाक साबित हो सकता है.