बिहार के मौलाना अब्दुल सलीम चतुर्वेदी कासमी को यूपी पुलिस ने बिहार से उठाकर सीधा सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. पर ये गिरफ्तारी हुई कैसे...जिसने सीएम योगी की मां पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, उसे न कानून का डर दिख रहा था, न बाबा के बुलडोजर का भय..उसे ऐसा लगा मानो यूपी पुलिस बिहार में कदम ही नहीं रख सकती, और उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती, क्योंकि बिहार पुलिस तो उसे हाथ तक नहीं लगा पाई, तो फिर यूपी के बहराइच जिले की पुलिस अचानक बिहार में कैसे पहुंच जाती है, इसकी कहानी बेहद दिलचस्प है...पत्रिका की रिपोर्ट दावा करती है, पहले लगा किडनैपिंग हुई, फिर पता चला ये गिरफ्तारी है...
नाटकीय ढंग से गिरफ्तारी
दरअसल 30 मार्च की शाम बिहार के पूर्णिया जिले के दलमालपुर गांव में सिविल ड्रेस में कुछ हथियारबंद लोग पहुंचते हैं, और मौलाना सलीम को गाड़ी में बिठा लेते हैं, आसपास के जो भी लोग इसे देखते हैं उन्हें लगता है मौलाना को किसी ने किडनैप कर लिया, ये ख़बर तुरंत इलाके में फैल जाती है, और लोग अपने स्तर से छानबीन में जुट जाते हैं..बात ओवैसी की पार्टी AIMIM के बिहार अध्यक्ष और अमौर विधायक अख्तरुल ईमान तक पहुंचती हैं, और वो थाने में कॉन्टैकट करते हैं तो पता चलता है यूपी एसटीएफ की गोरखपुर यूनिट ने मौलाना को अरेस्ट किया है...
यूपी के मुस्लिम बोले जेल में डालो इसे...
लेकिन अख्तरूल ईमान चाहे जिस भी वजह से उस मौलाना की पैरवी करें, पर यूपी के मुसलमान इस बात से बेहद गुस्से में हैं, और उन्होंने तो साफ कहा था मौलाना को न सिर्फ गिरफ्तार किया जाना चाहिए, बल्कि बुलड़ोजर भी चलना चाहिए... अब यूपी पुलिस ने बिहार में जाकर इस तरीके से एक्शन लिया है तो फिर सवाल ये भी उठ रहे हैं कि 80 मुकदमों के आरोपी मौलाना पर एक्शन लेने के लिए एसटीएफ को इस तरीके से क्यों भेजा गया कि शुरुआत में तरह-तरह की अफवाह फैलने लगी...फिलहाल गिरफ्तारी के बाद मौलाना की जो तस्वीर आई है, उसमें वो मास्क लगाए, सफेद पायजामा-कुर्ता पहने दिख रहा है, शायद उसे अब अपनी बयानबाजी पर अफसोस हो रहा होगा..क्योंकि मां तो मां होती है, मां पर ऐसी टिप्पणी भला कोई कैसे कर सकता है...