दुबई: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर सामरिक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की तैयारी कर रहा है, क्योंकि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध में तनाव बढ़ने की आशंका है. अगर ईरान के हमलों की सीधी मार झेल रहे UAE ने इस सैन्य संघर्ष में शामिल होने का फैसला किया, तो यह पहला खाड़ी देश होगा जो ईरान के खिलाफ सीधे युद्ध में शामिल होगा.
वहीं ईरान का कहना है कि वह इन देशों में अमेरिकी इंटरेस्ट को निशाना बना रहा है, लेकिन अगर सऊदी और यूएई जैसे देश हमला करते हैं, तो ईरान उन्हें सीधा निशाना बना सकता है. कई विशेषज्ञों का दावा है कि ईरान के प्रोक्सी कुवैत में सिविल वार करा सकते हैं. वहीं ईरान के जवाबी कार्रवाई में यूएई और सऊदी अरब को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. दावा यहां तक किया जा रहा है कि हो सकता है कि आम नागरिक यहां के राजाओं के खिलाफ बगावत कर दें, क्योंकि ज्यादातर लोगों का मानना है कि ईरान यहां हमला इसलिए कर रहा है, क्योंकि यहां पर अमेरिका का गहरा दखल है.
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अरब देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव लाने की पैरवी कर रहा है, जिसमें ऐसी कार्रवाई को अधिकृत किया जा सके. देश के राजनयिकों ने अमेरिका, यूरोप और एशिया की सैन्य शक्तियों से आग्रह किया है कि वे हॉर्मुज को बलपूर्वक खोलने के लिए एक गठबंधन बनाएं. रिपोर्ट में UAE अधिकारियों के हवाले से यह कहा गया है. अमेरिका का करीबी सहयोगी बहरीन, जो अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का घर है, इस प्रस्ताव को प्रायोजित कर रहा है. प्रस्ताव पर गुरुवार को वोटिंग होने की संभावना है.
खाड़ी देश अपना तेल निर्यात और आयात (खाद्य पदार्थों सहित) दोनों के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं. विश्व की लगभग 20% तेल आपूर्ति भी इसी रास्ते से गुजरती है. लेकिन अमेरिका-इजराइल की आक्रामकता के जवाब में ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर चोकहोल्ड (नाकाबंदी) लगा दी है, जिससे दुनिया की तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है और वैश्विक बाजार अस्त-व्यस्त हो गए हैं.
UAE ने क्या कहा?
UAE अधिकारियों ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि वे जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में सैन्य भूमिका निभाने के तरीकों की सक्रिय समीक्षा कर रहे हैं. इसमें ईरानी माइन्स को साफ करने में मदद करना और अन्य सहायता सेवाएं शामिल हैं. खाड़ी देश अमेरिका से आग्रह कर रहा है कि वह जलडमरूमध्य में स्थित द्वीपों, खासकर अबू मूसा द्वीप पर कब्जा कर ले. वर्तमान में यह द्वीप ईरान के प्रशासन में है, लेकिन UAE इसे अपना मानता है.
UAE के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर व्यापक वैश्विक सहमति है. UAE का यह नया आक्रामक रवैया उसके सामरिक दृष्टिकोण में मौलिक बदलाव है, क्योंकि देश का वाणिज्यिक केंद्र दुबई लंबे समय से ईरानी शासन को वित्तीय सहायता देता रहा है. अधिकारियों ने कहा कि अन्य खाड़ी देशों, जिनमें सऊदी अरब भी शामिल है, अब ईरान के खिलाफ हो गए हैं और वे चाहते हैं कि युद्ध तब तक जारी रहे जब तक इस्लामी शासन को कमजोर या उखाड़ नहीं फेंका जाता. हालांकि उन्होंने अभी तक सैनिकों को सीधे शामिल करने की प्रतिबद्धता नहीं दी है.
ईरानियों पर प्रवेश प्रतिबंध
युद्ध के दौरान UAE ने ईरानियों को देश में प्रवेश करने या ट्रांजिट करने से रोक दिया है. तीन प्रमुख एयरलाइंस ने बुधवार को यह घोषणा की. लंबी दूरी की उड़ानें संचालित करने वाली Emirates और Etihad के अलावा सस्ती उड़ानों वाली FlyDubai ने अपनी वेबसाइट पर यह जानकारी दी. UAE जैसे तानाशाही शासन वाले देश में प्रवेश नियम कभी-कभी अस्पष्ट होते हैं. लेकिन सभी एयरलाइंस की वेबसाइटों पर यह आदेश दिखाया गया.
इसमें कहा गया कि गोल्डन वीजा (10 वर्षीय निवास परमिट) धारकों को अभी भी प्रवेश की अनुमति है. अधिकारियों ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की. लेकिन यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब दुबई पहले ही शहर में स्थित ईरानी अस्पताल और ईरानी क्लब को बंद कर चुका है. ये दोनों संस्थान शाह के समय से शहर में मौजूद थे.
सऊदी ने भी युद्ध में शामिल होने का दिया संकेत
अरब दुनिया का आर्थिक और राजनीतिक नेता माने जाने वाले सऊदी अरब ने भी चेतावनी दी है कि अगर तेहरान अपनी सैन्य आक्रामकता नहीं रोकता तो वह युद्ध में शामिल हो जाएगा. देश की ओर से अब तक की सबसे मजबूत टिप्पणियों में, सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने 19 मार्च को ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उनका देश और उसके क्षेत्रीय साझेदार बहुत महत्वपूर्ण क्षमताएं और क्षमता रखते हैं जिन्हें वे इस्तेमाल कर सकते हैं.
सऊदी अरब ने अब तक ईरान के खिलाफ सैन्य जवाबी कार्रवाई से परहेज किया है, क्योंकि उसे डर है कि इससे उसके ऊपर और ज्यादा हमले हो सकते हैं. लेकिन उसकी धैर्य की सीमा अब खत्म होती दिख रही है. प्रिंस फरहान ने कहा कि 2023 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध बहाल होने के बाद ईरान के साथ जो थोड़ा विश्वास बनाया गया था, वह पूरी तरह से चकनाचूर" हो गया है.
उन्होंने कहा कि अगर आक्रामकता जारी रही तो संबंधों में लगभग कुछ भी बचाने लायक नहीं रह जाएगा. ईरान ने सऊदी अरब पर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं तथा हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकाबंदी करके उसके तेल-आधारित अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है.