नई दिल्ली : संसद का मॉनसून सत्र अब अपने सबसे अहम दौर में पहुंच गया है. 10 से 12 अगस्त तक सदन में सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव के आसार हैं. कांग्रेस ने अपने सांसदों को तीनों दिन संसद में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है. FCRA संशोधन विधेयक पर चर्चा को लेकर पार्टी ने अपने सांसदों की पूरी मौजूदगी सुनिश्चित करने की तैयारी की है. इस पूरे विवाद के केंद्र में FCRA में प्रस्तावित बदलाव हैं. सरकार का तर्क है कि विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने के लिए नियमों में बदलाव जरूरी हैं. वहीं, विपक्ष और कई संगठन इसके प्रावधानों को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
मामला अब सिर्फ भारत की राजनीति तक सीमित नहीं रहा. अमेरिकी सांसद रिले मूर ने FCRA संशोधन पर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई है और इसे भारत-अमेरिका संबंधों के लिए भी संवेदनशील मुद्दा बताया है. अमेरिकी आयोग और अन्य अमेरिकी पक्षों की ओर से भी भारत में धार्मिक स्वतंत्रता तथा विदेशी फंडिंग से जुड़े कानूनों पर पहले सवाल उठाए जा चुके हैं. इसके जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी आलोचना को सीधे खारिज करते हुए कहा है कि FCRA में बदलाव भारत की संसद और भारत की आंतरिक विधायी प्रक्रिया का विषय है.
मंत्रालय ने यह भी कहा कि कई देश विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने के लिए अपने-अपने कानून रखते हैं. अब निगाहें अमित शाह पर हैं. रिपोर्टों के मुताबिक सरकार FCRA विधेयक को संसद में आगे बढ़ाने की तैयारी में है और 12 अगस्त के आसपास चर्चा की संभावना जताई गई है. यानी सोमवार से संसद में तीन दिन तक सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि विदेशी फंडिंग, भारत की संप्रभुता, अमेरिकी टिप्पणी और सरकार की नीति पर बड़ा सियासी मुकाबला देखने को मिल सकता है.