कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आफताब आलम? सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के वर्षों बाद अमित शाह ने लिया उनका नाम

Abhishek Shandilya 25 Aug 2025 04:22: PM 5 Mins
कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आफताब आलम? सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के वर्षों बाद अमित शाह ने लिया उनका नाम

नई दिल्ली: सोनिया गांधी सुप्रीम कोर्ट चलाती थी? सोहराबुद्दीन एनकाउंटर में अमित शाह को जेल होती है, सुनवाई करते हैं जस्टिस आफताब आलम. 15 साल बाद अमित शाह ने खोला ऐसा काला चिट्ठा, हर कोई हैरान हैं. उस समय जस्टिस आफताब आलम को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को एक खत लिखा जाता है. गुजरात हाईकोर्ट के पूर्व जज SM सोनी ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक खत लिखा. उसमें लिखा कि ''जस्टिस आफताब आलम को गुजरात के मामलों से हटाया जाएं, क्योंकि वो दंगाई मानसिकता के जज हैं.'' इस स्टोरी में हम जानेंगे, सोहराबुद्दीन एनकाउंटर में अमित शाह की गिरफ्तारी क्यों हुई? सोनिया गांधी का सुप्रीम कोर्ट में दखल और फिर जस्टिस आफताब का किस्सा, अमित शाह ने 15 साल बाद क्यों सुनाया?

सीबीआई के मुताबिक, सोहराबुद्दीन की 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के पास कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई. उसकी पत्नी को तीन दिन बाद मार डाला गया और उसके शव को ठिकाने लगा दिया गया. सालभर बाद 27 दिसंबर 2006 को तुलसी राम प्रजापति की गुजरात और राजस्थान पुलिस ने गुजरात- राजस्थान सीमा के पास चापरी में कथित फर्जी मुठभेड़ में गोली मारकर हत्या कर दी, जो सोहराबुद्दीन के साथ मिलकर काम करता था. पुलिस ने उसे सोहराबुद्दीन के खिलाफ गवाह बनाया था.

कौन है सोहराबुद्दीन?

सोहराबुद्दीन उज्जैन के एक छोटे से गांव का रहने वाला था. उसकी मां सरपंच और उसके पिता जनसंघ के पूर्व सदस्य थे. सोहराबुद्दीन को लेकर तीन अलग-अलग राय थीं. कोई उसे जबरन वसूली करने वाला बताता था, किसी की नजर में वो आतंकवादी था, तो कोई उसे भ्रष्ट पुलिस वालों का गुर्गा मानता था. 2002 से 2003 के बीच सोहराबुद्दीन, तुलसीराम प्रजापति और मोहम्मद आजम ने मिलकर एक गैंग बनाया था. यह गैंग उदयपुर, अहमदाबाद और उज्जैन के मार्बल व्यापारियों और फैक्ट्री मालिकों से उगाही करता था. सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के बाद महीनों तक मीडिया में खबर छाई रही.

अमित शाह को CBI ने गिरफ्तार किया, गिरफ्तारी से ठीक पहले शाह ने एक शायरी सुनाई. ''मेरा पानी उतरते देख, किनारे पर घर मत बना लेना मैं समुन्दर हूं, लौट कर जरूर आऊंगा.'' यहां से शुरू होता है सियासत में बदले का वो खेल जिसकी कल्पना किसी को नहीं थी. एनकाउंटर मामले में गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री शाह और राजस्थान के मंत्री गुलाब चंद कटारिया का नाम सीबीआई की चार्जशीट में था.

अमित शाह ने गिरफ्तारी से पहले बीजेपी दफ्तर में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई, अपना इस्तीफा तब के सीएम नरेंद्र मोदी को सौंप दिया. 25 जुलाई 2010 को अमित शाह की गिरफ्तारी हुई और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया. करीब तीन महीने बाद 21 अक्टूबर 2010 को अमित शाह को जमानत मिल गई. हालांकि, इसके बाद कई महीनों तक उन्हें गुजरात से बाहर रहना पड़ा.

जब केंद्र में बीजेपी की सरकार आई, तो दिसंबर 2014 में अमित शाह, गुलाब चंद कटारिया जो उस वक्त राजस्थान सरकार में मंत्री थे उन्हें जमानत मिल गई. 16 आरोपियों को अदालत की तरफ से आरोप मुक्त कर दिया गया और क्लीन चिट मिल गई. लेकिन वर्षों बाद संसद में फिर से ये मुद्दा उठा. इस बार अमित शाह कानून लेकर आए! और बहस सोहराबुद्दीन एनकाउंटर तक जा पहुंची! एक पॉडकास्ट में अमित शाह आफताब आलम का जिक्र करते हैं. और सवाल उठाते हैं कि क्या सुप्रीम कोर्ट के जज भी सोनिया गांधी के इशारे पर काम करते थे? इसी इंटरव्यू में वो आफताब आलम की कहानी सुनाते हैं.

कौन हैं आफताब आलम?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जिन पूर्व जस्टिस आफताब आलम का जिक्र किया है. वो बिहार के पटना के रहने वाले हैं. आफताब आलम ने ही गुजरात से जुड़े मामलों की सुनवाई की थी. जस्टिस आफताब आलम पर कम्युनल माइंडसेट रखने का आरोप भी लगा था. तब गुजरात हाईकोर्ट के पूर्व जज एसएम सोनी ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर कहा था कि जस्टिस आफताब आलम को गुजरात के मामलों से हटाया जाए. उन्होंने ये पत्र जुलाई 2012 में लिखा था. इतना चौंका देने वाला मामला खुला है कि पूरी कांग्रेस शायद इसपर जवाब ना दे पाए? क्या एक ऐसे माइंडसेट वाले व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट में बैठाया गया जो धर्म देखकर फैसला सुनाता है?

2010 में आफताब आलम जिस बेंच में थे, उसी ने ये आदेश दिया था कि सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर की जांच सीबीआई करे. आलम ने जस्टिस तरुण चटर्जी के साथ ये आदेश सोहराबुद्दीन के भाई रुबादुद्दीन की याचिका पर दिया था. इसे संयोग कहें, नियति कहें या सुप्रीम कोर्ट में दिवाली की छुट्टी चल रही थी. लेकिन अमित शाह की जमानत रद्द करने की सीबीआई की अपील की सुनवाई उसी बेंच के सामने आ गई जो सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले की सीबीआई जांच की निगरानी कर रही थी.

जस्टिस आफताब आलम और आर एम लोढ़ा की बेंच ने जांच की निगरानी की थी. अब सवाल उठता है कि सोहरबुद्दीन एनकाउंटर अगर फेक था तो फिर उसे मारा किसने? साल 2014 में जब शाह को बरी किया गया तो राहुल गांधी ने तंज मारा और कहा, ''सोहरबुद्दीन को किसी ने नहीं मारा, वो खुद बस में मर गया था''. सोनिया गांधी पर बीजेपी फायर हो गई. CBI ने अपनी चार्जशीट में लिखा था, ''अमित शाह मुख्य केंद्र में हैं, इसलिए गिरफ्तार किया गया है''.

CBI को निर्देशित कर रहे थे जस्टिस आफताब आलम. इन्हीं पर आरोप लगा था कि इनका माइंडसेट हिन्दू-मुस्लिम वाला है. 2012 में गुजरात में चुनाव हुए. आफताब आलाम के आदेश के अनुसार शाह को चुनाव के बाद गुजरात जाने का आदेश था. नरेंद्र मोदी अकेले फिर से सत्ता में लौट आते हैं, शाह दोबारा गृह मंत्री बन जाते हैं. 2014 में शाह फिर दिल्ली आ गए, बीजेपी अध्यक्ष बनें, फिर गृह मंत्री, जिस वक्त शाह को गिरफ्तार किया गया था, उस वक्त केंद्र में पी चिदबंरम गृह मंत्री थे. उनके आदेश पर CBI ने शाह को गिरफ्तार किया था. कहा जाता है कि आफताब आलम ने केस CBI को इसलिए सौंपा ताकि शाह को गिरफ्तार कर पाए.

जिस दिन शाह को गिरफ्तार किया गया, उस दिन तात्कालीन CM नरेंद्र मोदी दिल्ली आएं, उन्होंने एक बड़ा ऐलान किया. करीब डेढ़ दशक बाद, फिर सोहराबुद्दीन एनकाउंटर, शाह की गिरफ्तारी का मसला छा गया. क्योंकि शाह कानून लेकर आएं हैं. अब किसी भी CM-PM या मंत्री को जेल हुई, 30 दिनों तक जमानत नहीं मिली तो उसकी सीट खाली हो जाएगी.

इस फैसला का विरोध विपक्ष कर रहा था. शाह ने इसी दौरान आफताब आलम का किस्सा सुनकर विपक्ष का वो कांड खोल दिया जो छिपाया जा रहा था. अमित शाह लौटकर आएं, उनके समुंद्र के किनारे जिसने भी घर बनाया था, वो सब ढह गए. शाह की गिरफ्तारी, जमानत, उन्हें बाहर रहने का आदेश सुनाना. CBI का चार्जशीट में नाम डालना, फिर कोर्ट से बरी हो जाना. कांग्रेस ने पूरी ताकत लगाई, लेकिन वो शाह को दोषी साबित नहीं कर पाई. आफताब आलम ने क्या पद पर बैठकर सोनिया गांधी का आदेश माना? क्या सुप्रीम कोर्ट में सोनिया का इशारा चलता था?

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