जो लोग अमित शाह को कड़क फैसले लेने वाले व्यक्ति के रूप में जानते हैं, वो दिल के कितने नरम हैं, ये किस्सा आप पहली बार सुनेंगे। जब उन्होंने गृहमंत्रालय का कार्यभार संभाला तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती हिंदुस्तान के उन 5 करोड़ से ज्यादा लोगों को नई जिंदगी देने का था, जिनकी जिंदगी कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़, कभी भूकंप तो कभी सुनामी में काल की भेंट चढ़ जाती थी और सरकारें ओह माई गॉड फिल्म की तरह इसे एक्ट ऑफ गॉड बताकर अपना पल्ला झाड़ लेती थी, राहत बचाव के नाम पर जो पैसा पहुंचता था, उसे भी नेता और प्रशासन मिलकर डकार जाते थे, पर अमित शाह ने आते ही एक्शन दिखाना शुरू किया। और ये कहा कि जैसे पीएम मोदी ने गुजरात में आपदा प्रबंधन पर भरपूर ध्यान दिया, और साल 2001 में जिस भुज इलाके में भूकंप से 14 हजार लोगों की मौत हुई, उसकी तस्वीर बदलकर रख दी। ठीक वैसे ही हमें देश स्तर पर करना होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आदेश साफ था आप अच्छे प्लान बनाओ, बजट की चिंता मत करो, ये बात भी सच है कि प्राकृतिक आपदाओं को आप टाल नहीं सकते, पर उससे होने वाले नुकसान को टाला जा सकता है। इसके लिए शाह ने आपदा मित्र बनाने पर बल दिया। किसी भी क्षेत्र में कोई घटना होती है तो तुरंत दिल्ली या राज्य से टीम भेजना संभव नहीं है, इसीलिए गांव-गांव में आपदा मित्र बनाए, ताकि तुरंत राहत-बचाव कार्य शुरू हो सके, फिर जाकर टीमें मोर्चा संभाल सके।
जो ये बताता है कि शाह का संकल्प आपदा से पहले ही उसे रोकने का इंतजाम करना है, तभी जवाद, अम्फान, फोनी, बिपरजॉय और यास जैसे कई तूफान बीते कई सालों में आए पर नुकसान पहले की तुलना में काफी कम हुआ।क्योंकि अब मौसम विभाग जब भी ऐसा कोई अलर्ट जारी करता है शाह आधी रात को भी बैठक बुला लेते हैं, मोदी पल-पल की अपडेट लेते हैं, और राजनीति से हटकर जिस राज्य के प्रभावित होने की आशंका होती है, वहां तत्काल मदद भेजते हैं। ताकि किसी भी तरह की परेशानी जनता को न हो। बीते कुछ सालों में जिस तरह से भारत ने आपदा प्रबंधन किया है, उसकी तारीफ यूएन से लेकर कई देश कर चुके हैं, आबादी के लिहाज से भारत को टक्कर देने वाला चीन भी हो सकता है आने वाले दिनों में भारत से सीखे, क्योंकि वहां भी इस तरह की समस्याएं बहुत हैं।
आज अपने देश के आधे से भी ज्यादा राज्यों में इस तरह का खतरा है, हिमाचल प्रदेश से लेकर उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों से लेकर समुद्र किनारे बसे राज्यों तक की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, उसके बावजूद शाह का सीक्रेट प्लान हर राज्य के लिए शानदार तरीके से काम आ रहा है। वरना यूएन की एक रिपोर्ट तो ये तक कहती है कि 1990 से 2000 तक करीब 30 मिलियन यानि 3 करोड़ लोग ऐसी घटनाओं से प्रभावित हुए, जिसेक बाद उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने एक टास्क फोर्स का गठन किया, चूंकि गुजरात और ओडिशा उस वक्त सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे, इसलिए दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री से बातचीत कर वाजपेयी जी ने एक टास्क फोर्स बनाया, फिर साल 2005 में एनडीएमए यानि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना हुई, जिसकी जर्सी देखते ही हर व्यक्ति ये समझ जाता है कि अब यमराज भी हमें नहीं ले जा सकते, क्योंकि देवदूत बनकर हमारे सामने सरकार के सिपाही खड़े हैं। ऐसे में जो लोग ये कहते हैं कि बीजेपी को वोट फ्री राशन, आयुष्मान कार्ड, हिंदुत्व, राम मंदिर और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दे की वजह से मिलते हैं, उन्हें अपनी जानकारी दुरुस्त करनी होगी, बीजेपी को वोट मोदी-शाह के उन फैसलों से भी मिलते हैं, जिसने लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ा, उन्हें नई जिंदगी दी।