5 साल पहले ही अमित शाह ने बिहार चुनाव की प्लानिंग कैसे कर ली थी, साल 2025 में एनडीए को बंपर जीत दिलाने का ख्वाब कैसे देख लिया था....इसका किस्सा ज्यादातर लोग नहीं जानते, यहां तक कि तेजस्वी भी इस बात से अनजान थे कि 2020 का बदला शाह 2025 में इस तरीके से लेंगे कि आरजेडी का सूपड़ा साफ हो जाएगा...जानकार कहते हैं शाह पहले चुपचाप काम करते हैं, जमीनी नेताओं के साथ मुलाकात करते हैं, उन्हें पूरा प्लान समझाते हैं, और फिर नेताओं की रैलियों तक की प्लानिंग करते हैं, उसके बाद मीडिया के सामने होश उड़ाने वाला दावा करते हैं....बिहार चुनाव में भी उन्होंने यही किया....
4 महीने पहले से ही पटना में डेरा डाल लिया...जमीन पर बीजेपी कितनी मजबूत हुई, इस बार कहां-कहां विपक्ष को कितनी मजबूती से पटखनी दे पाएगी, इसका पूरा खाका देखा, फिर कार्यकर्ताओं को ट्रिपल M का फॉर्मूला दिया... जिसमें पहला M था मोदी, दूसरा महिला और तीसरा मंदिर.
इसी के ईर्द-गिर्द पूरा चुनाव घूमता रहा...चाहे वो राम मंदिर से लेकर मां जानकारी मंदिर तक का जिक्र हो, मोदी की योजनाओं को घर-घर पहुंचाना हो या फिर महिलाओं को अपने पक्ष में करना हो...सबकुछ शाह ने बेहद सावधानी से करवाया....और फिर दो बड़ी भविष्यवाणी की.
हालांकि शुरुआत में विपक्ष ने शाह के इन दावों को हवा में उड़ा दिया, पर जैसे ही नतीजे आए, ठीक ऐसा ही हुआ, शाह ने अपनी 35 रैलियों और एक रोड शो के माहौल को देखकर ये भांप लिया था कि बिहार की जनता का मूड क्या है...जब विपक्षी नेता रैलियों पर फोकस थे, शाह हर बूथ का अपडेट ले रहे थे, पार्टी के ही कुछ नेता-कार्यकर्ता जो बागी रुख अपनाने के प्लान में थे, उन्हें अपने तरीके से हैंडल कर रहे थे...साल 2020 के चुनाव में जिस सोशल इंजीनियरिंग को बीजेपी सही से नहीं साध पाई थी, उसे शाह ने इस बार तरीके से साधा...
एक साथ कई मोर्चों पर शाह ने ऐसा सियासी चक्रव्यूह बनाया कि उसे भेदना विपक्ष के लिए मुश्किल हो गया....बिहार का चुनाव इस बार कौरवों VS पांडवों की लड़ाई बनकर रह गया, जिसमें जीत बीजेपी के 5 दलों वाले पांडवों की हुई, और बिहार की सड़कों पर तेजस्वी को दुर्योधन बताने वाले पोस्टर भी लगे...और इस नतीजे ने ये साफ कर दिया कि शाह के सियासी चक्रव्यूह को भेदने वाला कोई भी सियासी योद्धा विपक्ष के पास नहीं है....