लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपनी सबसे बड़ी प्रदेश कार्यसमिति बैठक का आयोजन किया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस ‘चुनावी पाठशाला’ में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को 2027 की जीत का गुरुमंत्र देंगे. पार्टी का मकसद 2024 के लोकसभा चुनाव के झटकों से उबरते हुए 2014 और 2017 के सफल फॉर्मूले को फिर से सक्रिय करना है.
बैठक का स्वरूप और महत्व
लखनऊ के राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय स्थित भीमराव आंबेडकर प्रेक्षागृह में आयोजित इस दो दिवसीय बैठक में करीब 2,850 प्रतिनिधियों को बुलाया गया है. अमित शाह मुख्य वक्ता होंगे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समापन करेंगे. बैठक में केंद्र के यूपी से जुड़े मंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, 2024 लोकसभा और 2022 विधानसभा के टिकटधारी उम्मीदवार, जिला स्तर के पदाधिकारी और विभिन्न मोर्चों के प्रमुख शामिल हो रहे हैं. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के अनुसार, बैठक में संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा और आगामी कार्ययोजना पर फोकस रहेगा. राजनीतिक प्रस्ताव भी पास किए जाएंगे, जिसमें युवाओं, किसानों, महिलाओं, ओबीसी और एससी वर्ग का भरोसा जीतने पर जोर दिया गया है.
2014-17 का 'शाह फॉर्मूला'
अमित शाह 2013-14 में यूपी प्रभारी बने थे, तब उन्होंने सपा-बसपा के पारंपरिक यादव-मुस्लिम-जाटव वोटबैंक (लगभग 40%) की काट के लिए बाकी 60% वोटों को एकजुट किया. इसमें सवर्ण, गैर-यादव ओबीसी (कुर्मी, मौर्य, निषाद, राजभर आदि) और गैर-जाटव दलित जातियों का गठबंधन बनाया गया, जिससे 2014 में बीजेपी ने 80 में से 71 लोकसभा सीटें जीतीं.
2017 में उन्होंने ‘पन्ना प्रमुख’ अवधारणा को हर बूथ पर लागू किया और क्षेत्रीय दलों (अपना दल, सुभासपा) को साथ लाकर गैर-यादव पिछड़ी जातियों में पकड़ मजबूत की. इससे बीजेपी रिकॉर्ड सीटों के साथ सत्ता में आई. बैठक में इन्हीं मॉडलों बूथ प्रबंधन और सामाजिक समीकरणों को दोबारा सक्रिय करने की रणनीति बनेगी.
2024 के झटके और चुनौतियां
2024 लोकसभा में सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव और कांग्रेस-सपा गठबंधन के कारण बीजेपी की सीटें घटीं. जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी और स्थानीय तालमेल की कमी की शिकायतें भी सामने आईं. हाल के विधान परिषद चुनावों में भी सपा ने सीटें बढ़ाईं, जिससे पार्टी में टेंशन बढ़ी है. बैठक में विपक्षी नैरेटिव, जातिवाद, यूजीसी और आरक्षण के असर से निपटने तथा एमएलसी में कमजोर प्रदर्शन पर मंथन होगा.
बीजेपी अब 2027 से पहले सामाजिक समीकरणों और संगठनात्मक मशीनरी को दुरुस्त करने पर जोर दे रही है. नवंबर में अमित शाह के पश्चिमी यूपी, ब्रज, कानपुर, अवध, काशी और गोरखपुर जैसे छह संगठनात्मक क्षेत्रों में बैठकों की योजना भी है. यह बैठक मिशन-2027 की आधिकारिक शुरुआत मानी जा रही है, जिसमें सत्ता की हैट्रिक का रोडमैप तैयार होगा.