नई दिल्ली: भाजपा की वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती शाहनवाज हुसैन के बेटे अरबाज की शादी में शामिल नहीं हो पाईं. इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखी और 32 साल पुराने रिश्ते की यादें ताजा कीं. उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि अरबाज के निकाह में फूफी की हैसियत से बैठना था, लेकिन स्वास्थ्य और यात्रा की वजह से नहीं पहुंच सकीं.
अरबाज का निकाह 25 अक्टूबर को नई दिल्ली में हरियाणा के जगाधरी से कांग्रेस विधायक अकरम खान की बेटी अफशां के साथ हुआ था. अगले दिन रिसेप्शन में कई राजनीतिक दिग्गज शामिल हुए, लेकिन उमा भारती नहीं पहुंच पाईं.
उमा भारती की पोस्ट
उमा भारती ने लिखा कि शाहनवाज जब वृंदावन में निमंत्रण पत्र देने आए थे, तब पुरानी यादें ताजा हो गईं. उन्होंने बताया कि 1993 में जब वे युवा मोर्चा की अध्यक्ष बनीं, तब शाहनवाज को आशंका थी कि अयोध्या आंदोलन में सक्रियता के कारण वामपंथियों ने उनकी छवि ''मुस्लिम समाज के दुश्मन'' जैसी बना दी थी, इसलिए वे उन्हें टीम में नहीं रखेंगी. लेकिन शाहनवाज की सक्रियता देखकर उन्होंने उन्हें जगह दी.
उमा भारती ने आगे लिखा कि शाहनवाज ने रेनू शर्मा के बारे में सबसे पहले उन्हें बताया था. उनके सुझाव पर दोनों ने शादी की और परिवारों ने भी स्वीकार किया. अरबाज के जन्म के बाद युवा मोर्चा के सदस्यों ने उनके घर पर खुशी मनाई थी. उन्होंने कहा, ''मैं शादियों में नहीं जाती, लेकिन अरबाज के निकाह में मुझे रहना था क्योंकि मेरी जिंदगी की यात्रा में शाहनवाज का साथ 32 साल का है. मेरी नजर में अभी भी वह बहुत छोटा है और मेरा भाई है.''
उन्होंने बताया कि केदारनाथ से वृंदावन लौटते समय मौसम का फर्क (केदारनाथ में माइनस 3 डिग्री और वृंदावन में गर्मी) होने के कारण वे दिल्ली नहीं जा पाईं. ''इसका मुझे जीवन भर अफसोस रहेगा.'' उन्होंने बांके बिहारी से अरबाज, अफशां, रेनू और शाहनवाज की खुशहाली के लिए प्रार्थना की.
शाहनवाज का जवाब
शाहनवाज हुसैन ने जवाब देते हुए लिखा, ''दीदी, आपके भावपूर्ण शब्दों ने मुझे भावुक कर दिया. 32 वर्षों का हमारा साथ, आपका स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद मेरे जीवन की अनमोल पूंजी है. अरबाज और अफशां के निकाह में आपकी कमी बहुत खली, लेकिन विश्वास था कि दीदी का आशीर्वाद सदैव हमारे साथ है.''
उन्होंने याद दिलाया कि अरबाज का पहला जन्मदिन भी उमा भारती के घर पर मनाया गया था. उन्होंने कहा कि जब उमा भारती दिल्ली आएंगी तो अरबाज और अफशां को आशीर्वाद देंगी और वे दोनों को दीदी की ओर से भोजन कराएंगे. ''आप मेरी दीदी ही नहीं, मेरी अभिभावक हैं.'' यह पोस्ट दोनों नेताओं के लंबे व्यक्तिगत और राजनीतिक रिश्ते को सामने लाती है.