कर्नाटक SIR में कोई गड़बड़ी नहीं: मंत्री सतीश जारकीहोली का बयान, एक करोड़ नामों का हटना सही बताया

Amanat Ansari 29 Oct 2026 12:23 PM 1 Mins
कर्नाटक SIR में कोई गड़बड़ी नहीं: मंत्री सतीश जारकीहोली का बयान, एक करोड़ नामों का हटना सही बताया

बेंगलुरु: कर्नाटक के मंत्री सतीश जारकीहोली ने राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) का खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि कर्नाटक में यह प्रक्रिया सही तरीके से पूरी हुई और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं हुई. जारकीहोली ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध कर्नाटक में SIR को लेकर नहीं था. उनकी आपत्ति बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसे लागू करने के तरीके पर थी.

उन्होंने कहा कि कर्नाटक में विरोध और लोगों को दी गई ट्रेनिंग का असर पड़ा, जिससे प्रक्रिया सही तरीके से पूरी हो सकी. दूसरे राज्यों में भी इसी तरह सही तरीके से SIR लागू किया जाना चाहिए था. करीब एक करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल पूछे जाने पर जारकीहोली ने कहा कि ये ऐसे लोग थे जिनकी मौत हो चुकी थी, जो दूसरी जगह शिफ्ट हो गए थे या जिनके नाम वोटर लिस्ट में एक से ज्यादा बार (डुप्लिकेट) दर्ज थे.

उन्होंने कहा कि इस तरह की जांच दूसरे राज्यों में भी होनी चाहिए थी. चुनाव आयोग के अनुसार, SIR से पहले कर्नाटक में करीब 5.54 करोड़ मतदाता थे. अंतिम मतदाता सूची (27 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित) में यह संख्या घटकर लगभग 4.54-4.55 करोड़ रह गई है. यानी करीब 99.3 से 99.8 लाख (लगभग एक करोड़) नाम कम हुए. ड्राफ्ट लिस्ट में इससे भी ज्यादा नाम हटाए गए थे, जिसके बाद कुछ नाम जोड़े गए.

हटाए गए नामों में सबसे बड़ा हिस्सा “स्थायी रूप से शिफ्टेड” (permanently shifted) मतदाताओं का था (करीब 65 लाख), इसके अलावा मृत, अनुपस्थित (absent), डुप्लिकेट और अन्य श्रेणियों के नाम शामिल थे. जारकीहोली के इस बयान को कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं के रुख से अलग माना जा रहा है, जो अन्य राज्यों में SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं.

यह बयान MLC चुनावों के नतीजों के बाद आया है. SIR प्रक्रिया का उद्देश्य अयोग्य नामों को हटाकर मतदाता सूची को साफ और शुद्ध बनाना था. अंतिम सूची में पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है, साथ ही कुछ थर्ड-जेंडर मतदाता भी शामिल हैं.

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