रामपुर: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने समाजवादी पार्टी के महासचिव और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान पर बुधवार को बड़ा एक्शन लिया है. एजेंसी ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के अधीन जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अटैच कर लिया. ईडी के मुताबिक अटैच की गई संपत्ति का बुक वैल्यू 426.46 करोड़ रुपए है, जबकि मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1170 करोड़ रुपए आंका गया है. यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत की गई.
ईडी की लखनऊ जोनल ऑफिस ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि रामपुर के जौहर नगर स्थित यूनिवर्सिटी परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के नाम पर है. इस ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी और वे इसके नियंत्रण में भी हैं. आजम खान यूनिवर्सिटी के मानद कुलाधिपति भी हैं.
ईडी ने रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी. इनमें आरोप था कि यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की कृषि भूमि जबरन कब्जाई गई. सिंहनखेड़ा गांव में करीब 34 एकड़ में फैले शत्रु संपत्ति के 45 भूखंडों पर भी अवैध कब्जे का मामला सामने आया. लीज रद्द होने के बाद जिला प्रशासन ने कब्जा वापस ले लिया.
सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप
जांच में सामने आया कि सरकारी विकास कार्यों के लिए जारी धन का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी परिसर में किया गया. ठेकेदारों से धन ट्रस्ट को दान के रूप में वापस पहुंचाए जाने के सबूत मिले. एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने बताया कि करीब 186 करोड़ रुपए के पीडब्ल्यूडी ठेकों की राशि में से 30-40 फीसदी यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगा. एक अन्य फर्म ने ट्रस्ट को 40 लाख रुपए दान देने की बात स्वीकार की.
विधायक-सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से 6.60 करोड़ रुपए के काम कराए गए, जब आजम खान जल निगम के अध्यक्ष थे. राज्य सरकार ने पंडाल, ओबीसी छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के लिए 23.41 करोड़ रुपए मंजूर किए थे. बाद में शर्तें बदलकर मालिकाना हक यूनिवर्सिटी को दे दिया गया.
426 करोड़ का स्रोत नहीं मिला
जिला मूल्यांकन अधिकारी ने परिसर की 59 इमारतों की लागत 494.46 करोड़ और जमीन का मूल्य 4.63 करोड़ रुपए आंका. कुल लागत 499.09 करोड़ रुपए बनी. ट्रस्ट ने आयकर में सिर्फ 78.32 करोड़ का पूंजीगत खर्च दिखाया, जिसमें से 12.29 करोड़ गैर-वास्तविक पाया गया. वैध स्रोतों से सिर्फ 72.63 करोड़ का खर्च साबित हुआ.
शेष 426.46 करोड़ रुपए के स्रोत का संतोषजनक हिसाब नहीं दिया जा सका. इसी रकम को अपराध से अर्जित आय मानते हुए संपत्ति अटैच की गई. ईडी ने 19 अगस्त 2026 को भी यूनिवर्सिटी परिसर पर तलाशी ली थी, जिसमें दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए थे. आगे की जांच जारी है.