नई दिल्ली: प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित रेस कोर्स मस्जिद को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को अहम आदेश सुनाया. अदालत ने मस्जिद में नमाज अदा करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया. वहीं, केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया कि दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रतिवेदन पर फैसला होने तक मस्जिद को नहीं तोड़ा जाएगा. जस्टिस अनीश दयाल की बेंच के सामने केंद्र सरकार के स्थायी वकील आशीष दीक्षित ने कहा कि भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रतिवेदन पर जल्द से जल्द, चार सप्ताह के भीतर फैसला लेगा. इस बीच कोई भी तोड़फोड़ या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी.
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को तय की है. दीक्षित ने यह भी कहा कि आसपास के इलाके में तोड़फोड़ का काम चल रहा है, इसलिए सुरक्षा कारणों से मस्जिद में प्रवेश देना उचित नहीं है. उन्होंने याचिकाकर्ता के कानूनी अधिकार पर भी सवाल उठाया.
अदालत ने कहा कि वह सरकार को नमाज की अनुमति देने के लिए मजबूर नहीं कर सकती. जस्टिस दयाल ने टिप्पणी की है कि अगर कोई घायल हो जाता है तो मुआवजा कौन देगा? उन्होंने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि अधिकारियों को फैसला करने दें और यह उचित सुझाव है.
सैयद अहमद सऊद ने याचिका दायर कर मस्जिद को तोड़फोड़ से बचाने और नमाज के लिए प्रवेश बहाल करने की मांग की थी. उनका दावा है कि मस्जिद 1977 से अधिसूचित वक्फ संपत्ति है और सेकंड-ग्रेड की संरक्षित इमारत है. याचिका में कहा गया था कि बिजली और पानी काट दिया गया है और L&DO अधिकारियों ने मौखिक रूप से खाली करने को कहा था. रेस कोर्स मस्जिद जयपुर पोलो ग्राउंड परिसर में स्थित है और प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) के काफी करीब है. फिलहाल केंद्र के आश्वासन से मस्जिद सुरक्षित है, लेकिन नमाज की अनुमति नहीं मिली है.