कोलकाता: ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका, फिरहाद हकीम ने मेयर पद से इस्तीफा दे दिया

Amanat Ansari 03 Jun 2026 06:29: PM 3 Mins
कोलकाता: ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका, फिरहाद हकीम ने मेयर पद से इस्तीफा दे दिया

कोलकाता: ट्रिनमूल कांग्रेस में चल रहे संकट ने एक और नाटकीय मोड़ ले लिया है. कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी से अपने पद से इस्तीफा देने की अनुमति मांगी है. सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी ने हाकिम के अनुरोध पर सहमति जता दी है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब टीएमसी को सत्ता से बाहर होने के बाद अपनी सबसे गंभीर आंतरिक बगावत का सामना करना पड़ रहा है. पार्टी के बड़े संख्या में विधायकों ने निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी का खुलकर समर्थन किया है और पार्टी की मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था को चुनौती दी है.

हाकिम का कदम टीएमसी संकट को और गहरा करता है

ममता बनर्जी के सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगियों में से एक और पार्टी के सबसे चेहरे-परिचित नेताओं में शामिल फिरहाद हाकिम हाल के दिनों में राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गए हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की नबन्ना में हुई प्रशासनिक समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया था.

हाकिम के अलावा टीएमसी के कई अन्य वरिष्ठ नेता, जिन्हें ममता बनर्जी के प्रति वफादार माना जाता है, भी इस बैठक में शामिल हुए. इससे पार्टी में समीकरण बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं. हाकिम के साथ टीएमसी विधायक नयना बंद्योपाध्याय, अशोक देब और कुणाल घोष भी इस प्रशासनिक बैठक में शामिल हुए, जबकि पार्टी की विधायक इकाई अभूतपूर्व विभाजन की ओर बढ़ती नजर आ रही है.

बागी गुट ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया

यह घटनाएं बागी टीएमसी विधायकों द्वारा ताकत दिखाने के नाटकीय प्रदर्शन के बाद हुई हैं. 58 बागी विधायकों के एक समूह ने निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा दल का नया नेता बनाने का औपचारिक समर्थन किया और अपना फैसला विधानसभा स्पीकर रथिंद्र बोस को सूचित किया. ऋतब्रत बनर्जी अपने साथी बागी विधायक संदीपन साहा और अन्य बागी विधायकों के साथ स्पीकर से मिले और कथित तौर पर 58 विधायकों के हस्ताक्षर वाले समर्थन पत्र सौंपे.

बागी गुट ने विधानसभा दल के लिए नई नेतृत्व व्यवस्था का भी प्रस्ताव रखा. इसमें ऋतब्रत बनर्जी को नेता, जबकि जावेद खान, संदीपन साहा और शिउली साहा को उपनेता तथा रघुनाथगंज विधायक अखरुज्जमान को मुख्य सचेतक बनाए जाने का प्रस्ताव दिया गया. ध्यान देने वाली बात यह है कि ऋतब्रत बनर्जी, खान और साहा भी मुख्यमंत्री अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुए थे.

पार्टी में बढ़ती दूरी

जब बागी विधायकों की बैठक में शामिल कोई भी विधायक ममता बनर्जी द्वारा आयोजित सेंट्रल कोलकाता में धरने पर नहीं दिखा, तब राजनीतिक उथल-पुथल और ज्यादा साफ दिखी.
दूसरी ओर, कालीघाट नेतृत्व से जुड़े कई नेता, जिनमें हाकिम, बंद्योपाध्याय, देब और घोष शामिल हैं, बागी विधायकों की विधानसभा बैठक से दूर रहे और इसके बजाय सरकार की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुए.

इन घटनाक्रमों ने पार्टी के भविष्य की दिशा को लेकर अटकलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि वह विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद उबरने की कोशिश कर रही है.
कुछ दिन पहले ही वरिष्ठ टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तिदार और छह पार्टी विधायकों ने कल्याणी में अधिकारी द्वारा बुलाई गई एक अन्य प्रशासनिक समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया था, जिससे राज्य में राजनीतिक संरेखण बदलने की चर्चाएं शुरू हो गईं.

टीएमसी के भविष्य पर सवाल

बीजेपी सरकार का कहना है कि ऐसी बैठकें प्रशासनिक गतिविधियां हैं, जिनमें सभी दलों के चुने हुए प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं. मुख्यमंत्री पद संभालते ही सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि विपक्षी सांसदों और विधायकों को सरकारी कार्यक्रमों और जिला-स्तरीय समीक्षा बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा. पिछले हफ्ते कुणाल घोष ने ऐसी बैठकों में भाग लेने का बचाव किया था, लेकिन यह भी माना था कि इस मुद्दे पर पार्टी के अंदर चर्चा चल रही है.

 उन्होंने कहा था, "हम राज्य सरकार द्वारा बुलाई गई प्रशासनिक बैठकों का बहिष्कार नहीं करना चाहते. लेकिन जब हमारे कार्यकर्ताओं पर पोस्ट-पोल हिंसा में हमले हो रहे हैं और उन्हें घर से बेघर किया जा रहा है, तो हमें ऐसी बैठकों में जाने से पहले दो बार सोचना पड़ता है. हमारी पार्टी भी इस पर चर्चा कर रही है कि हमें इन बैठकों में भागीदारी जारी रखनी चाहिए या नहीं." मेयर पद से इस्तीफा देने की अनुमति मांगने का हाकिम का कदम टीएमसी नेतृत्व के भविष्य और आने वाले हफ्तों में विपक्षी पार्टी के  रूप-रंग को लेकर सवालों को और तेज कर देगा.

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