क्या मोदी जीवनपर्यंत प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं? जैसे पंडित जवाहर लाल नेहरू रहे, लाल बहादुर शास्त्री रहे, इंदिरा गांधी रहीं. तो क्या मोदी की कुंडली में भी कोई ऐसा योग है जो उन्हें जीवन भर प्रधानमंत्री बनाए रख सकता है. अगर ऐसा है तो फिर क्या प्रधानमंत्री की रेस में खड़े नेताओं को ये उम्मीद अगले कुछ सालों के लिए छोड़ देनी चाहिए. यही सवाल जब एक ज्योतिष के सामने पहुंचा, जो कि मोदी की कुंडली पर करीब से नजर रखते हैं, और एक-एक बारिकियों को बेहतर ढंग से बताते हैं तो उनका जवाब बेहद हैरान कर देने वाला था.
एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में आचार्य संतोष संतोषी बताते हैं ''PM मोदी की जो कुंडली पब्लिक में है, वो पूरी तरह से सही नहीं है, पब्लिक में जो कुंडली है. उसमें मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को दोपहर 11 बजे बताया गया है. उनका लग्न वृश्चिक बताया गया है, लेकिन मैंने उनके कुछ करीबियों से बात की तो पता चला पीएम मोदी का जन्म समय 17 सितंबर 1950 को 10.46 बजे है, और लग्न तुला है.
इनकी कुंडली में बालि की तरह शत्रुहंता योग है, जैसे रामायण में हम पढ़ते हैं कि बालि के सामने जो भी जाता था, उसकी शक्ति क्षीण हो जाती थी. ठीक वैसे ही मोदी के सामने अगर कोई शत्रु भी जाता है तो वो कमजोर महसूस कर लौट जाता है. ये योग काफी कम लोगों की कुंडली में होता है. इनकी कुंडली में शनि ही सर्वे सर्वा है. इसीलिए इनके अंदर लोगों को बांधने की क्षमता अद्भूत है. चाहे वो बोलकर हो या अपनी भावनाओं से महसूस करवाकर. जो लोग ये कहते हैं कि मोदी तानाशाह हैं, उन्हें तानाशाही का योग भी देखना होगा. ज्योतिष विद्या ये कहती है कि तानाशाही का योग तब बनता है, जब शनि मंगल को देखे और मंगल शनि को देखे, लेकिन मोदी की कुंडली में ये योग नहीं है, यानी मोदी तानाशाह नहीं हैं.
जिन ज्योतिष ने बातें बताई, उनका अनुभव काफी गहरा है. वो कोई तारीख स्पष्ट नहीं करते कि मोदी कब तक प्रधानमंत्री के पद पर बने रहेंगे. पर उनकी बातों से ये साफ समझ आता है कि मोदी की कुंडली में ग्रह नक्षत्रों की जो चाल है. वो साफ इशारा करती है कि मोदी अपने जीवनपर्यंत बड़े पद पर बने रहेंगे. वो अलग बात है कि प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देकर राष्ट्रपति बन जाएं या फिर झोला उठाकर चलने वाली जो बात करते हैं, वो फैसला ले लें. क्योंकि मोदी का जीवन शुरू से ही संन्यासी की तरह रहा है, इसे लेकर वो कई बार कह चुके हैं.
फिलहाल भारत में ऐसी व्यवस्था तो नहीं कि कोई प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की कुर्सी पर एक बार बैठ जाए तो फिर उतरे ही नहीं. रूस वाला सिस्टम तो है नहीं कि पुतिन ने एक बार फैसला कर दिया कि जिंदगीभर मैं ही रहूंगा तो मैं ही हूं. यहां लोकतंत्र का शासन है, हर 5 साल में चुनाव होते हैं. जनता जिसे पसंद करती है, उसे चुनती है. इस देश ने आजादी के बाद से अब तक दर्जनों प्रधानमंत्री देखे हैं, जिनमें से कईयों को जनता ने कई बार चुना तो कइयों को एक बार में ही कुर्सी से उतार दिया.
तो ये आने वाला वक्त बताएगा कि मोदी कब तक अपनी कुर्सी पर बने रहेंगे, पर उनकी कुंडली देखने वाले ज्योतिष ये साफ इशारा कर रहे हैं कि अगर मोदी को हराने का सपना कोई देख रहा है, तो वो उसे भूल जाए, क्योंकि मोदी को हराने आसान नहीं होगा. जिस दिन मोदी कुर्सी छोड़ेंगे उस दिन शाह या योगी दोनों में से किसी एक के पीएम बनने की संभावना ज्यादा दिख रही है, क्योंकि दोनों की कुंडली में बड़ा पद नजर आ रहा है.
कहते हैं जिसके साथ भगवान हो, वो इंसान हर मुश्किल परिस्थितियों से निकल जाता है और दुनिया देखती रह जाती है. पीएम मोदी के साथ भी आज यही हो रहा है. जो लोग ये कहते हैं कि विदेशों में मोदी के जाने पर भीड़ जुटाई जाती है, वो शायद ये नहीं जानते कि मोदी का कुंडली का 12वां घर, जो विदेश के बारे में बताता है, वो साफ-साफ इशारा करता है कि मोदी विदेशों में भी खूब पॉपलुर होंगे, उन्हें हीरो की तरह प्रसिद्ध मिलेगी. कोई किसी को बुलाए या न बुलाए, लोग खुद दौड़े चले आएंगे.