Ayodhya Ram mandir : अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर के दान चोरी मामले की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने आउटसोर्स स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सूत्रों के मुताबिक महाकुंभ के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं और दान राशि का प्रवाह अचानक बढ़ गया था. बढ़ती नकदी की गिनती के लिए ट्रस्ट ने आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कर्मचारियों की तैनाती की, लेकिन इन्हीं नियुक्तियों को लेकर अब जांच एजेंसियां पड़ताल कर रही हैं.
सूत्रों का दावा है कि जिन लोगों को कैश काउंटिंग जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी सौंपी गई, उनमें से कई पहले फूड डिलीवरी, राइडर, ऑटोमोबाइल कंपनी या अन्य छोटे-मोटे काम करते थे. आरोप है कि उनके पास बड़ी मात्रा में नकदी संभालने या कैश काउंटिंग का कोई पूर्व अनुभव नहीं था. बताया जा रहा है कि ऐसे करीब 8 से 10 लोगों को इंटरव्यू के बाद आउटसोर्स कैशियर के रूप में 15 से 20 हजार रुपये मासिक वेतन पर नियुक्त किया गया.
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लवकुश मिश्रा ने कथित तौर पर अपनी पत्नी के बैंक खाते में हर महीने बड़ी रकम ट्रांसफर की। पुलिस इन लेन-देन की भी जांच कर रही है.
इस बीच एक अन्य आरोपी रमाशंकर मिश्रा की भाभी ने दावा किया था कि उनके देवर की नौकरी ट्रस्ट में एक परिचित की सिफारिश से लगी थी. हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बिना पर्याप्त अनुभव वाले लोगों को सिफारिश या लापरवाही के चलते इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई, जिससे दान राशि की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए. मामले की जांच जारी है और पुलिस वित्तीय लेन-देन के साथ भर्ती प्रक्रिया की भी जांच कर रही है.