डीआईजी वैभव कृष्ण ने 40 आदिवासी महिलाओं का बनारस घूमने का सपना किया साकार

Global Bharat 29 Jun 2026 11:53: PM 2 Mins
डीआईजी वैभव कृष्ण ने 40 आदिवासी महिलाओं का बनारस घूमने का सपना किया साकार

चंदौली: पुलिस की छवि अक्सर कानून-व्यवस्था तक सीमित मानी जाती है, लेकिन चंदौली में एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने संवेदनशील पुलिसिंग की अलग मिसाल पेश की. डीआईजी वैभव कृष्ण ने वह वादा निभाया, जो उन्होंने करीब दो सप्ताह पहले नौगढ़ क्षेत्र के एक दूरस्थ आदिवासी गांव में महिलाओं से किया था.

कहानी की शुरुआत 15 जून से होती है. उस दिन डीआईजी वैभव कृष्ण नौगढ़ क्षेत्र के पंडी गांव पहुंचे थे. गांव में महिलाओं से बातचीत के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि वहां रहने वाली कई आदिवासी महिलाओं ने आज तक किसी बड़े शहर को देखा ही नहीं है. शहर की चर्चा होते ही उनके चेहरे पर उत्सुकता और हैरानी साफ दिखाई दे रही थी. इसी दौरान डीआईजी वैभव कृष्ण ने महिलाओं से पूछा, “अगर आपको किसी शहर को देखने और घूमने का मौका मिले, तो आप कहां जाना पसंद करेंगी?”

इस पर महिलाओं ने बिना किसी झिझक के एक ही जवाब दिया, “हम बनारस शहर देखना चाहते हैं और बाबा काशी विश्वनाथ व संकट मोचन मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं.” महिलाओं की इस इच्छा को सुनने के बाद डीआईजी ने उसी समय अपना वादा किया और चंदौली पुलिस को मिशन शक्ति अभियान के तहत पूरी यात्रा की व्यवस्था करने के निर्देश दे दिए.

सोमवार को वह वादा हकीकत बन गया. चंदौली के पंडी गांव की 40 आदिवासी महिलाओं ने पहली बार अपने जीवन में शहर देखा. दोपहर करीब 2:30 बजे डीआईजी वैभव कृष्ण स्वयं इन महिलाओं के साथ बनारस पहुंचे. यहां उन्होंने महिलाओं को शहर का भ्रमण कराया और बाबा काशी विश्वनाथ धाम तथा संकट मोचन मंदिर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए.

सबसे भावुक बात यह रही कि चंदौली जिले का पंडी गांव वाराणसी से अधिक दूर नहीं है, लेकिन इसके बावजूद गांव की अधिकांश महिलाएं आज तक शहर नहीं पहुंच पाई थीं. यह बात सुनकर खुद डीआईजी वैभव कृष्ण भी हैरान रह गए थे.

पंडी गांव में करीब 80 से 85 परिवार रहते हैं. इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्होंने कभी अपने गांव से बाहर की दुनिया नहीं देखी. गांव की सीमाओं तक सिमटी जिंदगी में शहर उनके लिए सिर्फ एक नाम था. इस यात्रा में बुजुर्ग महिलाएं, युवतियां और बच्चियां भी शामिल थीं. जब उनकी बस बनारस की सड़कों पर पहुंची, तो हर दृश्य उनके लिए बिल्कुल नया था. मंदिरों की भव्यता, शहर की रौनक और लोगों की भीड़ को वे बड़े ध्यान और उत्साह से देखती रहीं.

महिलाओं के चेहरों पर पहली बार शहर देखने की खुशी साफ झलक रही थी. यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं थी, बल्कि उन महिलाओं के लिए अपनी दुनिया से बाहर निकलकर एक नई दुनिया देखने का पहला अवसर भी था. डीआईजी वैभव कृष्ण की यह पहल अब चंदौली में संवेदनशील पुलिसिंग और सामाजिक सरोकार की एक मिसाल के रूप में चर्चा में है.

Pandi Village Kashi Vishwanath Mission Shakti Chandauli

Description of the author

Recent News