Azam Khan News : आजम खान के लिए 2027 का विधानसभा चुनाव सिर्फ सियासी नहीं, बल्कि कानूनी लड़ाई भी बन गया है. उनके वकील इमरानुल्लाह का दावा है कि हाईकोर्ट की नई बेंच के सामने मामला आने के बाद उन्हें जमानत मिलने की संभावना बन सकती है. अगर ऐसा हुआ तो आजम खान के जेल से बाहर आने का रास्ता खुल सकता है. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या बाहर आने के बाद वह चुनाव लड़ पाएंगे.
मौजूदा कानूनी स्थिति में सिर्फ जमानत मिल जाना चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त नहीं माना जाता. वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मल्होत्रा के मुताबिक, जमानत का मतलब सजा खत्म होना नहीं है. आजम खान के खिलाफ अब तक 8 मामलों में अदालतें दोषसिद्धि और सजा सुना चुकी हैं. इनमें कुछ मामलों में लंबी जेल की सजा भी हुई है.
यहीं जनप्रतिनिधित्व कानून यानी रिप्रजेंशन ऑफ पीपुल्स एक्ट की धारा 8(3) अहम हो जाती है. किसी सांसद या विधायक को दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर दोषसिद्धि के आधार पर अयोग्यता का प्रावधान लागू होता है. आजम खान खुद 2022 में तीन साल की सजा के बाद रामपुर विधानसभा की सदस्यता गंवा चुके हैं.
हालांकि कानूनी तस्वीर का सबसे अहम हिस्सा सजा पर रोक और दोषसिद्धि पर रोक के अंतर में है. केवल जमानत मिलने से दोषसिद्धि समाप्त नहीं होती. चुनाव लड़ने की राह खोलने के लिए संबंधित सजाओं व दोषसिद्धियों के खिलाफ ऊपरी अदालत से प्रभावी राहत, खासकर कनविक्शन पर स्टे, बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है. पहले भी अदालतों के मामलों में यह फर्क चुनावी पात्रता के लिए निर्णायक रहा है.
इसलिए 2027 से पहले आजम खान जेल से बाहर आते हैं या नहीं, यह पहला सवाल है, लेकिन चुनाव लड़ पाएंगे या नहीं, इसका जवाब उनकी सभी संबंधित दोषसिद्धियों पर मिलने वाली न्यायिक राहत तय करेगी.