सोनीपत : हरियाणा के सोनीपत से सामने आई शिवचरण राम रतन गुप्ता की कहानी रिश्तों और बदलते पारिवारिक समीकरणों पर सवाल खड़े कर रही है. करीब 74 वर्षीय शिवचरण गुप्ता महाराष्ट्र के रहने वाले थे और कभी कपड़े के कारोबार से जुड़े रहे थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह करीब डेढ़ साल से सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे. उनकी पत्नी मीना गुप्ता का भी इसी दौरान निधन हो गया था.
शिवचरण की तीन बेटियां हैं. बताया गया कि उन्होंने अपनी बेटियों को पढ़ाया-लिखाया और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा किया. उनकी दो बेटियां सरकारी शिक्षिका हैं. पिता की तबीयत खराब होने के दौरान वृद्धाश्रम प्रबंधन ने बेटियों से संपर्क भी किया था. बताया गया कि शिवचरण अपनी बेटियों से मिलने की इच्छा जताते रहते थे, लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी.
5 अगस्त के आसपास उनके निधन के बाद भी तीनों बेटियां सोनीपत नहीं पहुंचीं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बड़ी बेटी ने अंतिम संस्कार के खर्च के लिए संस्था को 5,100 रुपये भेजे और वीडियो कॉल के जरिए अंतिम संस्कार देखने की बात कही. इसके बाद अंतिम संस्कार संस्था और समाजसेवियों की मदद से कराया गया, जबकि बेटियों ने मोबाइल स्क्रीन के जरिए पिता को अंतिम विदाई दी.
अस्थि विसर्जन के समय भी बेटियां मौके पर नहीं पहुंचीं. अब सोनीपत के गीता मंदिर में शिवचरण गुप्ता की तेरहवीं की रस्में पूरी की गईं. हवन-यज्ञ हुआ, उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए गए और प्रसाद वितरित किया गया. इस कार्यक्रम में भी तीनों बेटियां मौजूद नहीं थीं. वृद्धाश्रम प्रबंधन ने परिवार की सहमति से धार्मिक रस्में पूरी कराईं.
इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आधुनिक जिंदगी की व्यस्तता इतनी बढ़ गई है कि माता-पिता के अंतिम संस्कार और तेरहवीं जैसे मौकों पर भी उनकी मौजूदगी सिर्फ वीडियो कॉल तक सीमित रह जाए. हालांकि बेटियों की निजी परिस्थितियों और उनके पक्ष की पूरी जानकारी सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आई है.