नई दिल्ली: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में 'वंदे मातरम' गायन को लेकर सोनिया गांधी पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आरोपों के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी 'INDIA' गठबंधन के घटक दलों—कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT)—ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए इसे असल मुद्दों से ध्यान भटकाने और राष्ट्रवाद के नाम पर सियासत करने का प्रयास बताया है।
'बीजेपी नेता गाकर दिखाएं पूरा वंदे मातरम'
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने बीजेपी पर सीधा हमला बोलते हुए खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा, "मैं बीजेपी के सांसदों और कार्यकर्ताओं को चुनौती देता हूं कि वे सामने आएं और 'वंदे मातरम' के सभी छह पद गाकर दिखाएं। मैं पूरी ईमानदारी से कह रहा हूं कि मैं ऐसा नहीं कर सकता, लेकिन क्या इससे मैं कम राष्ट्रवादी हो जाता हूं?" आजाद ने आगे सवाल किया कि जब बीजेपी के कार्यक्रमों में मूल गीत के बजाय फिल्मी गाना बजाया गया, तब उस पर आपत्ति क्यों नहीं जताई गई।
संजय राउत ने सदन की गैर-मौजूदगी पर उठाए सवाल
शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि 'वंदे मातरम' के सभी छह पदों को गाना अनिवार्य बनाना आवश्यक नहीं था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब संसद में इससे संबंधित विषय पर चर्चा हो रही थी, तब सदन में न तो प्रधानमंत्री मौजूद थे और न ही गृह मंत्री। राउत ने आजादी के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने जनचेतना जगाने के लिए मुख्य रूप से 'वंदे मातरम' और 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारों का इस्तेमाल किया था।
'उस समय बीजेपी का वजूद ही नहीं था'
पटना में कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जिस समय 'वंदे मातरम' की रचना हुई थी, उस समय संघ परिवार या बीजेपी का कोई अस्तित्व नहीं था। उस दौर में केवल कांग्रेस परिवार संघर्ष कर रहा था और अब बीजेपी केवल राजनीतिक विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रही है।