काठमांडू/पोखरा: भारतीय सेना की अग्निपथ योजना को लेकर नेपाल में एक अहम विकास सामने आया है. नेपाल के पूर्व गोरखा सैनिक अब इस योजना का खुलकर समर्थन कर रहे हैं और नेपाली युवाओं के लिए भारतीय सेना में भर्ती दोबारा शुरू करने की मांग उठा रहे हैं. उन्होंने बालेन शाह सरकार से अपील की है कि भर्ती पर लगी रोक तुरंत हटाई जाए.
नेपाल ने अग्निपथ योजना लागू होने के बाद नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में शामिल होने से रोक दिया था. अब पूर्व गोरखा सैनिकों का कहना है कि इस रोक से युवाओं के हाथ से रोजगार का एक बड़ा मौका छिन गया है. पोखरा में “इंडियन एक्स-सर्विसमेन गोरखा ब्रिगेड नेपाल पोखरा” ने प्रदर्शन आयोजित किया. इसमें पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर भर्ती फिर शुरू करने की मांग की.
समूह ने जिला प्रशासन के जरिए बालेन शाह सरकार को ज्ञापन भी सौंपा. ब्रिगेड के चेयरमैन कर्नल कृष्ण बहादुर खत्री ने चेतावनी दी कि सुगौली संधि के समय से चली आ रही करीब 200 साल पुरानी सैन्य परंपरा खतरे में पड़ गई है. उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में कम वेतन और कठिन परिस्थितियों में काम करने के बजाय अग्निपथ के तहत भारतीय सेना में शामिल होना कहीं बेहतर विकल्प है.
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि चार साल की सेवा के दौरान युवाओं को कई सुविधाओं के साथ लगभग 45-50 लाख रुपये की कमाई हो सकती है. यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय सेना प्रमुख धीरज सेठ नेपाल की यात्रा पर जाने वाले हैं. 1816 की सुगौली संधि के बाद से नेपाली गोरखा भारतीय सेना में भर्ती हो रहे हैं.
1947 के त्रिपक्षीय समझौते के बाद भी यह परंपरा जारी रही. गोरखा सैनिक अपनी बहादुरी के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं. पूर्व गोरखा सैनिकों का यह रुख अग्निपथ योजना पर नेपाल में चल रही बहस को नया मोड़ दे सकता है. अब देखना होगा कि बालेन शाह सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती है.